डीडीसीए जांच अवैध: एलजी

  • 8 जनवरी 2016
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दिल्ली ज़िला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) में कथित घोटाले की जांच के लिए बने दिल्ली सरकार के जांच आयोग को उपराज्यपाल नजीब जंग ने अवैध और असंवैधानिक क़रार दिया है.

दिल्ली सरकार ने इस फ़ैसले को अदालत में चुनौती देने का निर्णय लिया है.

एलजी नजीब जंग ने दिल्ली के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस बारे में सलाह ली गई थी. गृह मंत्रालय की राय में जांच आयोग ग़ैरक़ानूनी है.

ख़त में संविधान के कई पहलुओं का हवाला देते हुए इसे अवैध बताया गया है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डीडीसीए में कथित घोटाले की जांच के लिए जाने माने वकील गोपाल सुब्रह्मण्यम को जांच आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था.

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दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के अनुसार गृह मंत्रालय के इस फ़ैसले से साफ़ ज़ाहिर है कि मोदी सरकार भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ने में दिलचस्पी नहीं रखती.

पार्टी नेता आशुतोष कहते हैं, "वित्त मंत्री अरुण जेटली के ख़िलाफ़ गंभीर आरोप हैं, तो ऐसे में वह जांच से भाग क्यों रहे हैं?"

आगे वे कहते हैं, "जांच आयोग के अध्यक्ष गोपाल सुब्रह्मण्यम ने ख़ुद कहा है कि वह मामले की खुली जांच करेंगे. कोई भी आदमी उसे देख सकता है, वहां मौजूद रह सकता है. अगर अरुण जेटली को लगता है कि उनके ख़िलाफ़ कोई केस नहीं है तो वो कमीशन के सामने पेश हों और अपना पक्ष रखें."

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भूतपूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के दौर में इसी तरह के एक जांच आयोग के गठन के मामले पर आशुतोष ने कहा कि तब केंद्र सरकार ने आपत्ति नहीं जताई थी.

आशुतोष के अनुसार आम आदमी पार्टी सरकार केंद्र के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अदालत जाएगी, जहां पहले से ऐसा एक और मामला है, जिसमें हाईकोर्ट ने उस पर जारी एक इन्क्वायरी को नहीं रोका है. अदालत का फ़ैसला अब भी आना है. आशुतोष का तर्क है कि केंद्र उस फ़ैसले के आने तक इंतज़ार कर सकता था.

आम आदमी पार्टी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली डीडीसीए में वित्तीय और कई तरह के आरोप लगाए हैं. इस पर वित्त मंत्री ने कहा था कि यह दिल्ली सरकार की उन्हें बदनाम करने की साज़िश है.

जेटली ने अरविंद केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी के पांच प्रवक्ताओं के ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा किया है.

अरुण जेटली 1999 से 2013 तक डीडीसीए के अध्यक्ष थे. दिल्ली सरकार के अनुसार घोटाले तभी के हैं.

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