सुस्त होते चीन से भारत को ये 5 फ़ायदे

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विश्व बैंक, आईएमएफ़ समेत दुनिया की बड़ी संस्थाएं मानने लगी हैं कि तकरीबन 25 साल से आर्थिक तरक्की का फ़र्राटा भर रहा चीन अब सुस्ताने लगा है.

चीन में उत्पादन की रफ़्तार धीमी पड़ी है और अब ये भी साफ हो गया है कि उसकी विकास दर 7 फ़ीसदी से नीचे जाएगी.

चीन के शेयर बाज़ारों का ये हाल है कि इस दौर को ‘द ग्रेट फ़ॉल ऑफ़ चाइना’ कहा जाने लगा है.

चीन में आर्थिक धीमेपन का असर दुनियाभर पर दिख रहा है, भारत पर भी. ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि चीन के इस संकट के भारत के लिए कितने मौके हैं.

अर्थशास्त्री और इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के डायरेक्टर सुनील सिन्हा की नज़र में वो 5 मौके जिनका फ़ायदा भारत उठा सकता है:

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पहला, दुनियाभर में कमोडिटी यानी तेल, कोयला, स्टील इत्यादि की कीमतें कम होने का फ़ायदा भारत को मिल सकता है.

2015-16 का बजट बनाते समय 30,000 करोड़ रुपए की तेल सब्सिडी का आकलन किया गया था और ये आकलन 70 डॉलर प्रति बैरल औसत के इंडियन बास्केट पर आधारित था.

इंडियन बास्केट का मतलब वो भाव जिस पर भारत को कच्चा तेल मिलता है.

कहने की ज़रूरत नहीं कि भारत को इस मोर्चे पर कितनी राहत मिली होगी, जब हाल ही में इंडियन बास्केट 29.13 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर तक पहुँच गया था.

इस सस्ते तेल से भारत सरकार के पास बचे पैसे का उपयोग अन्य योजनाओं में करने का बेहतर विकल्प है.

दूसरा, कमोडिटी की कीमतों में गिरावट का सीधा असर थोक महंगाई दर पर पड़ा है. पिछले कुछ महीनों से इसके बढ़ने की गति बहुत धीमी है.

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तीसरा, चीन में आर्थिक सुस्ती का मतलब है कि विकसित देशों के बड़े निवेशक वहाँ निवेश करने से बचेंगे और बेहतर रिटर्न की उम्मीद में भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था में निवेश कर सकते हैं.

2015 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल जनवरी-सितंबर के दौरान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफ़डीआई 18 प्रतिशत बढ़कर 2,651 करोड़ डॉलर रहा. 2014 में भारत में 2878 करोड़ डॉलर रहा था.

चौथा, भारत ‘मेक इन इंडिया’ पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. चीन में मैन्युफैक्चरिंग की रफ़्तार घटने से भारत के पास मेक इन इंडिया को अमली जामा पहनाने का समय है. यहाँ तक कि भारत सरकार चीनी कंपनियों को भी अपने कारखाने भारत मे लगाने का न्यौता दे सकती है.

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हालाँकि इसके लिए भारत को आर्थिक सुधारों और भारत में कारोबार करने के नियमों पर ध्यान देना होगा.

पाँचवाँ फ़ायदा ये हो सकता है कि भारत के पास अपना आधारभूत ढाँचा मज़बूत करने का मौका है. विदेशी निवेश और सस्ती कमोडिटी से बुनियादी सुविधाएं तैयार करने में आसानी होगी.

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