बाल यौन शोषण पर सुप्रीम कोर्ट की सलाह

  • 11 जनवरी 2016
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सुप्रीम कोर्ट के अनुसार बच्चों का यौन शोषण या बलात्कार करने वाले अपराधियों की सज़ा को लेकर कड़े क़ानून बनाने पर संसद को विचार करना चाहिए.

कोर्ट ने संसद को बलात्कार के संदर्भ में 'बच्चे' की परिभाषा पर भी पुनर्विचार करने को कहा है.

संभवत: यह पहली बार है कि जब सुप्रीम कोर्ट नेे कम उम्र और दस वर्ष से कम आयु के बच्चों के बीच अंतर को साफ़ किया है.

कोर्ट के अनुसार नवजातों और दस वर्ष से कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार और यौन शोषण की घटनाएं पाश्विक व विकृत मानसिकता को दर्शाती हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने संसद से कहा है कि इस संदर्भ में उसे अलग से कड़ा क़ानून बनाना चाहिए. जिसके तहत अपराधियों के लिए कड़ी से कड़ी सज़ा का प्रावधान हो.

कोर्ट ने संसद को मात्र सलाह दी है. यह संसद पर बाध्यकारी सलाह नहीं हैं. यह सरकार की इच्छा पर होगा कि वह इस सलाह को स्वीकार करे या न करे.

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