अंडर-19 वर्ल्ड कप से निकले और छा गए

  • 23 जनवरी 2016
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27 जनवरी से बांग्लादेश में 11वां अंडर-19 वर्ल्ड कप क्रिकेट शुरू हो रहा है. 14 फरवरी तक चलने वाले इस टूर्नामेंट में नौ टेस्ट खेलने वाले देशों के अलावा सात एसोसिएट और एफ़िलिएट सदस्य देश भी हिस्सा ले रहे हैं.

भारत यह टूर्नामेंट तीन बार जीत चुका है और इस बार भी उसे ख़िताब का दावेदार माना जा रहा है. दरअसल क्रिकेट की दुनिया में अपनी चमक बिखरने के लिए अंडर-19 वर्ल्ड कप क्रिकेट बहुत बड़ा प्लेटफ़ॉर्म है.

क्रिकेट की दुनिया के कई बड़े सितारों ने अपनी पहल चमक इसी टूर्नामेंट में दिखाई है.

एक नज़र इन भारतीय क्रिकेटरों पर जो अंडर-19 क्रिकेट से निकले और विश्व क्रिकेट के आसमान पर छा गए.

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विराट कोहली: मौजूदा दौर के सबसे विस्फोटक बल्लेबाज़ों में शुमार हैं विराट कोहली. वनडे में सबसे तेज़ 7000 रन पूरा करने वाले विराट कोहली की कप्तानी में भारतीय अंडर-19 टीम ने 2008 में वर्ल्ड कप जीतने का करिश्मा दिखाया था. कोहली मौजूदा समय में टेस्ट टीम के कप्तान हैं. उन्हें सचिन तेंदुलकर के बाद भारत के सबसे ज़ोरदार बल्लेबाज़ माना जा रहा है.

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रविंद्र जडेजा: टीम इंडिया में उपयोगी ऑलराउंडर के तौर पर अपनी जगह पुख़्ता कर चुके रविंद्र जडेजा तो दो-दो अंडर-19 वर्ल्ड कप में टीम का हिस्सा रह चुके हैं. 2006 में वे बहुत ख़ास नहीं कर पाए थे, लेकिन 2008 में टीम इंडिया को चैंपियन बनाने में जडेजा का अहम योगदान रहा था, उन्होंने टूर्नामेंट में शानदार गेंदबाज़ी करते हुए कुल 10 विकेट चटकाए थे.

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रोहित शर्मा: रोहित शर्मा भी अंडर-19 टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. 2006 में फ़ाइनल में पाकिस्तान के हाथों हारने वाली भारतीय टीम में रोहित शर्मा शामिल थे. उन्होंने उस टूर्नामेंट के छह मैचों में 41 की औसत से 295 रन बनाए थे. हालांकि फ़ाइनल में वे बुरी तरह नाकाम हो गए थे.

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चेतेश्वर पुजारा: चेतेश्वर पुजारा 2006 के अंडर-19 वर्ल्ड कप में वे टीम इंडिया के स्टार साबित हुए थे. पुजारा ने छह मैचों में 116 से ज़्यादा की औसत से 349 रन बनाए थे और भारत की ओर से इकलौता शतक उनके नाम ही रहा था. उन्हें प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट आंका गया था. अब टेस्ट क्रिकेट में पुजारा टीम का भरोसेमंद चेहरा माने जाते हैं.

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शिखर धवन: बाएं हाथ के तूफ़ानी बल्लेबाज़ के बतौर स्थापित शिखर धवन ने भी पहली बार अपनी चमक अंडर-19 क्रिकेट में ही बिखेरी थी. 2004 में बांग्लादेश में आयोजित अंडर-19 वर्ल्ड कप टीम इंडिया जीत नहीं पाई थी, लेकिन टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा रन शिखर धवन के बल्ले से ही निकले थे. उन्होंने 7 मैचों में 3 शतक की बदौलत 505 रन ठोके थे.

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सुरेश रैना: वनडे और टी-20 क्रिकेट के स्टार खिलाड़ी सुरेश रैना भी अंडर-19 वर्ल्ड कप में हिस्सा ले चुके हैं. 2004 के अंडर 19 वर्ल्ड कप में सुरेश रैना ने भारत के लिए ऑलराउंड खिलाड़ी की भूमिका शानदार ढंग से निभाई थी. बल्ले से 7 मैचों में 247 रन बनाने के साथ साथ रैना ने 5 विकेट भी चटकाए थे. इसके अगले साल वे टीम इंडिया में शामिल हो गए.

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इरफ़ान पठान: कपिल देव के बाद तेज़ गेंदबाज़ी करने वाले ऑलराउंडर के तौर पर टीम इंडिया में जगह बनाने वाले इरफ़ान पठान 2002 में अंडर-19 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व कर चुके थे. इसके बाद टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक और अपनी ऑलराउंड क्षमता के चलते उन्हें वंडरब्वॉय कहा जाने लगा था. हालांकि समय के साथ वे अपनी कामयाबी को कायम नहीं रख पाए.

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युवराज सिंह: युवराज सिंह 2000 में अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम में युवराज सिंह ने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन किया था. उन्हें मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट आंका गया था. युवराज सिंह ने सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ महज़ 25 गेंदों पर 58 रन ठोक दिए थे, 5 चौके और 5 दमदार छक्कों के साथ. यहां से शुरू हुआ सफ़र अभी भी जारी है.

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मोहम्मद क़ैफ़: 2000 में अंडर-19 वर्ल्ड कप का ख़िताब जीतने वाली टीम इंडिया के कप्तान थे मोहम्मद क़ैफ़. महज 20 साल की उम्र में क़ैफ़ को टेस्ट कैप पहनने का मौका मिल गया था. बेहतरीन फ़ील्डिंग की वजह से भी क़ैफ़ को काफ़ी चर्चा मिली. नेटवेस्ट ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में टीम इंडिया को जीत दिलाने वाली उनकी पारी को लोग आज भी नहीं भूले हैं.

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वीरेंद्र सहवाग: भारत के सबसे विस्फोटक बल्लेबाज़ों में एक वीरेंद्र सहवाग 1998 में दक्षिण अफ्रीका में खेले गए अंडर-19 वर्ल्ड कप में अपने बल्ले से बहुत ख़ास नहीं कर पाए थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. टेस्ट क्रिकेट में भारत की ओर से तिहरा शतक बनाने वाले वे इकलौते बल्लेबाज़ हैं- ये करिश्मा उन्होंने दो बार दिखाया था.

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हरभजन सिंह: 1998 में अंडर-19 वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने वाली टीम इंडिया में हरभजन सिंह भी शामिल थे. बाद में हरभजन सिंह भारतीय क्रिकेट के सबसे कामयाब गेंदबाज़ों में शुमार किए गए. टेस्ट मैचों में 2000 से ज्यादा रन और 417 विकेट झटकने वाले हरभजन ने वनडे क्रिकेट में भी 269 विकेट चटकाए हैं.

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