देशद्रोही समर्थक विश्वविद्यालय में कैसे: संघ

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हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के शोध छात्र रोहित वेमुला की ख़ुदकुशी के विरोध में उठ रही आवाज़ों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने कहा है कि विश्वविद्यालय के छात्र किसी देशद्रोही के समर्थन में आंदोलन कैसे कर सकते हैं?

आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉक्टर मनमोहन वैद्य ने नागपुर के रेशमीबाग स्थित संघ कार्यालय में बीबीसी हिंदी से बातचीत में यह सवाल उठाया.

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई सजा का विरोध करने वाले तत्व विश्वविद्यालय में कैसे हो सकते हैं.

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रोहित वेमुला हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के शोध छात्र थे. विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें और उनके चार साथियों को निलंबित कर दिया था. इसके विरोध में वो आंदोलन कर रहे थे. 17 जनवरी को रोहित ने फांसी लगाकर ख़ुदकुशी कर ली थी.

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रोहित वेमुला की ख़ुदकुशी के सवाल पर वैद्य ने इस घटना को जाति के नाम पर समाज में भेद खड़े करने का दुर्भाग्यपूर्ण प्रयास बताया. उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक स्वार्थ के लिए ऐसे हथकंडों का उपयोग करना अच्छा नहीं है.

डॉक्टर वैद्य ने हालांकि रोहित की ख़ुदकुशी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. लेकिन याक़ूब मेमन का नाम लिए बिना कहा कि जिसको सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पाया और सजा दी. उसका विरोध करने वाले तत्व यूनिवर्सिटी में कैसे हो सकते है? उनको सपोर्ट करने वाले तत्व कौन से हैं, इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए.

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उन्होंने कहा कि या तो ख़ास जाति के लोग ऐसा कर रहे हैं या कुछ लोग उनको साधन बनाकर आगे बढ़ा रहे हैं. ये तत्व कौन से हैं? ये घटनाएं महत्वपूर्ण और गंभीर हैं.

इस मामले में विरोध करने वालों की ओर से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात किए जाने पर डॉक्टर वैद्य ने संघ से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी के एक नेता की कथित पिटाई की घटना का उल्लेख किया.

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उन्होंने कहा कि कोई छात्र यदि अपनी भावना व्यक्त करता है तो दूसरे को भी अपनी बात कहने का अधिकार है. उसने जब अपनी बात कही तो, इन लोगों ने उसके कमरे पर जाकर उसके साथ मारपीट की.

डॉक्टर वैद्य ने कहा कि संघ का वैचारिक विरोध करने वाले तत्व बहुत पहले से संघ को अल्पसंख्यक और और दलित विरोधी बताते आए हैं. लेकिन संघ में आने पर लोगों को पता चलता है कि ऐसा है नहीं.

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उनका कहना है कि बहुत से लोग संघ में आने को तैयार हैं. डॉक्टर वैद्य ने बताया कि दो साल पहले दशहरा उत्सव में अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े दलित नेता संघ को समझने के लिए नागपुर आए थे.

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उन्होंने बताया कि उन दलित नेताओं का मानना था कि उन्होंने संघ के बारे में न पहले ऐसा कभी सोचा था और न कभी अनुभव किया था.

वैद्य ने कहा कि संघ के विरोधी उसे प्रगति करने और व्यापक बनने से रोक नहीं सकते हैं.

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