अरुणाचल संकट पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस

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पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की केंद्र सरकार की सिफ़ारिश को कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी.

सोमवार को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से मिलने के बाद कांग्रेस नेताओं ने अरुणाचल प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता के लिए भारतीय जनता पार्टी को ज़िम्मेदार बताया.

60 सदस्यों वाली अरुणाचल विधानसभा में कांग्रेस के 47 विधायक थे. इनमें से 21 विधायकों ने बग़ावत कर दी, जिसके बाद नबम तुकी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई.

इन लोगों ने भाजपा के 11 विधायकों के साथ मिल कर नबम तुकी सरकार को हटाने का प्रयास किया. बाद में, कांग्रेस के 14 विधायकों को अयोग्य करार दे दिया गया.

कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने राज्यपाल के साथ मिल कर राज्य सरकार को कमज़ोर किया है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस भाजपा की सरकार के ख़िलाफ़ संसद और अदालत में जंग छेड़ेगी और इस मुद्दे को आम जनता के बीच भी ले जाएगी.

वहीं केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि केंद्र सरकार इस बारे में सिर्फ़ अपनी ज़िम्मेदारी पूरा कर रही है.

उन्होंने कहा, "अरुणाचल प्रदेश में संवैधानिक संकट है. वहां की सरकार अल्पमत में आ गई है. फिर अदालत ने हस्तक्षेप किया और इस पूरे गतिरोध में छह महीने बीत गए. ऐसे में कोई फ़ैसला लेना ही था."

संविधान के अनुच्छेद 174(1) के अनुसार राज्य विधानसभा के दो सत्रों के बीच छह महीने से ज्यादा का अंतर नहीं हो सकता है.

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