'गोलियों की बौछार के बीच बातचीत नहीं'

  • 25 जनवरी 2016
प्रणव मुखर्जी, राष्ट्रपति इमेज कॉपीरइट RashtrapatiBhvn

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने पड़ोसी देशों के साथ सभी समस्याओं के निपटारे के लिए बातचीत पर ज़ोर दिया है. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि गोलियों की बौछार के बीच बातचीत संभव नहीं.

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में उन्होंने यह बात कही.

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाहौर का दौरा किया और पाकिस्तान के साथ समग्र वार्ता शुरू करने की घोषणा की गई.

लेकिन इसके कुछ दिनों बाद पंजाब के पठानकोट में एयरबेस पर हमले हो गया जिसके बाद दोनों देशों के विदेश सचिवों की बैठक को टाल दिया गया.

राष्ट्रपति ने अपने भाषण में किन बातों पर ज़ोर दिया, आइए जानते हैं:

1. चरमपंथ उस कैंसर की तरह है, जिसे ऑपरेशन से काट कर बाहर निकाल देना चाहिए.

2. सूखे, बाढ़ और अंतरराष्ट्रीय मंदी के बावजूद भारत ने 7.30 फ़ीसदी की विकास दर हासिल की. अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने की ज़रूरत है.

3. आर्थिक सुधार आगे बढ़ाना होगा और इसके लिए तमाम राजनीतिक मतभेदों को पीछे छोड़ देना चाहिए.

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4. तमाम मुद्दों पर राष्ट्रीय आम सहमति बनानी चाहिए. इस पर राजनीति न हो और न ही देर होनी चाहिए.

5. लोकतंत्र में विरोध, विद्रोह, मांग और शिकायतें होती रहती हैं. हमें इनके बीच सामंजस्य बनानी चाहिए.

6. साफ़ ऊर्जा, शहरी योजना और पर्यावरण की रक्षा के लिए नई खोज पर ध्यान देना होगा.

7. उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हमने अच्छा काम किया है, पर इसे और बेहतर बनाने की आवश्यकता है.

8. नए और खुले विचारों का स्वागत किया जाना चाहिए.

9. यह सदी चौथी औद्योगिक क्रांति की होगी. इसमे नई तरह के खोज पर ध्यान देना होगा.

10. वर्ष 2015 अब तक का सबसे गर्म साल रहा है. हमें पर्यावरण रक्षा पर गंभीरता से काम करना होगा.

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