अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन पर हो-हल्ला

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पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने को हरी झंडी मिलने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार और भाजपा पर चौतरफा हमला बोला है.

कई हफ्तों से सियासी संकट झेल रहे अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन लगाने की केंद्र सरकार की सिफारिश को लेकर मंगलवार को राष्ट्रपति ने अपनी सहमति दे दी.

लेकिन राज्य के निवर्तमान मुख्यमंत्री नाबाम टुकी जहां अब भी बहुमत होने का दावा कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस समेत विपक्ष अरुणाचल प्रदेश के सियासी संकट के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा रहा है.

वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि वो सिर्फ अपनी ज़िम्मेदारी को निभा रही है क्योंकि संविधान के मुताबिक़ राज्य विधानसभा के दो सत्रों में छह महीने से ज्यादा का अंतर नहीं हो सकता है.

60 सदस्यों वाली अरुणाचल विधानसभा में कांग्रेस के 47 विधायक थे. इनमें से 21 विधायकों ने पिछले महीने बग़ावत कर दी, जिसके बाद नाबाम टुकी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई.

इन लोगों ने भाजपा के 11 विधायकों के साथ मिल कर नाबाम टुकी सरकार को हटाने का प्रयास किया. बाद में, कांग्रेस के 14 विधायकों को अयोग्य करार दे दिया गया.

कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम के लिए केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी को ज़िम्मेदार बताती है और उसने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की केंद्र की सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

लेकिन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश के हालात के लिए कांग्रेस को ही ज़िम्मेदार बताया है.

उन्होंने कहा, "कांग्रेस के मित्रों से आग्रह है कि केंद्र को दोष न दें. अरुणाचल में जो कुछ हुआ, उसके लिए वो ख़ुद ही ज़िम्मेदार हैं. राष्ट्रपति शासन लगाने में हमारा कोई हित नहीं है."

लेकिन राष्ट्रपति शासन को मंज़ूरी के बाद नाबाम टुकी ने कहा, "हमें उम्मीद थी कि वो ऐसा ही कुछ करेंगे. हमारी सराकर को शुरू से तंग किया जा रहा था."

टुकी ने कहा कि वो क़ानूनी तौर पर इस मुद्दे पर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.

टुकी ने कहा कि कांग्रेस के पास अब भी 31 विधायकों के साथ बहुमत है. उन्होंने राज्य के सियासी संकट के लिए फिर भारतीय जनता पार्टी को ज़िम्मेदार बताया.

वहीं जनता दल यूनाइटेड के नेता केसी त्यागी ने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने को 'काला दिन' बताया.

उन्होंने कहा, "ये गणतंत्र दिवस पर भारतीय गणतंत्र के लिए काला दिन है."

वहीं आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष का कहना है कि अब गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में है. उन्होंने ट्वीट किया, "भारतीय लोकतंत्र का दुखद दिन. अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन, गेंद अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में."

कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, "ये सब केंद्र के इशारे पर हुआ है, वो भी ख़ासकर तब जब मामला कोर्ट में है."

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मौके पर भाजपा नेता एलके आडवाणी के उस बयान को याद किया जिसमें उन्होंने देश में इमरजेंसी वाले हालात बताए थे.

केजरीवाल ने ट्वीट किया, "अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन. आडवाणी जी ने सही कहा था कि देश में इमरजेंसी जैसे हालात हैं."

जनता दल अध्यक्ष शरद यादव ने ट्वीट किया, "अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाना लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या का संकेत होगा और मैं इसका कड़ा विरोध करता हूँ."

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