'शनि की साढ़े-साती महिलाओं पर नहीं आती?'

  • 26 जनवरी 2016
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महाराष्ट्र के अहमदनगर में मशहूर शनि शिगणापुर मंदिर में परंपरा के विपरीत पूजा करने जा रही महिलाओं को रोके जाने के बाद इस विषय पर ट्विटर पर भी गरमागरम बहस हुई.

हैशटैग #ShaniShingnapur ट्विटर ट्रेंड्स में शीर्ष पर आ गया और दो घंटे के भीतर ही इस ट्रेंड के साथ क़रीब छह हज़ार ट्वीट हुए.

कांग्रेस के सांसद शशि थरूर और उनकी दिवंगत पत्नी सुनंदा पुष्कर की मंदिर में पूजा करते हुए तस्वीर भी ख़ूब साझा की गई.

एक ट्विटर यूज़र ने उस ख़बर का लिंक भी साझा किया जिसमें बताया गया है कि मंदिर के ट्रस्ट में महिलाएं भी सदस्य हैं.

ज़्यादातर लोगों ने अपनी राय रखते हुए मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध पर सवाल उठाए.

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हेमंत कुमार ने ट्वीट किया, "सती प्रथा, दहेज प्रथा आदि बंद हुई तो 21वी शताब्दी मे महिलाओं को शनि मंदिर मे प्रवेश-निषेध अन्याय है."

एक अन्य ट्वीट में हेमंत ने लिखा, "कोई पंडा ज़रा ये बताए कि क्या शनि की साढ़े-साती महिलाओं पर नही आती है?"

वहीं सिंह एसडी नाम के अकाउंट से ट्वीट किया गया, "समझ से परे है कि मंगल को शनि की लड़ाई के पीछे मंशा क्या है? कहीं सरकारी विफलता को छुपाने की चाल तो नहीं."

दीपक भारतदीप ने इसे लोकतंत्र का प्रमाण बताते हुए ट्वीट किया, "शनि शिगणापुर में नारी प्रवेश के आंदोलन को धर्म पर हमला नहीं वरन् अपने लोकतांत्रिक होने का प्रमाण समझकर गर्व करें."

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प्रफुल्ल सिंह ने ट्वीट किया, 'बिना स्त्री के गर्भ के अवतार भी पैदा नहीं हो सकते. स्त्री की इस ताक़त को पुरुष पचा नहीं पाते. हर जगह बेड़ियां तैयार रखते हैं.'

हालांकि बहुत से लोग इस आंदोलन के पीछे साज़िश भी देख रहे हैं.

संतोष गुप्ता ने लिखा, "इन आंदोलनकारी महिलाओं को देखकर नही लगता कि ये शनिदेव पर तेल चढ़ाकर अपने कर्मों का प्रायश्चित करना चाहती है."

रॉबिनहुड नाम के अकाउंट से ट्वीट किया गया, "ये विदेशी एनजीओ का ड्रामा है. कई राज्यों में मंदिरो में महिलाओं के जाने पर पाबंदी है पर बीजेपी राज्य ही में विरोध क्यों हो रहा है?"

हिंदू जागृति नाम के अकाउंट से लिखा गया, 'शनि शिगणापुर में महिलाओं के प्रवेश के लिए स्त्री मुक्ति के लिए आक्रोश करने वाले मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश के लिए क्यों नहीं चिल्लाते?'

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