मुख्यमंत्री चांडी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर का आदेश

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केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी के ख़िलाफ़ सोलर घोटाले में प्राथमिकी दर्ज कराने के कोर्ट के आदेश के बाद उनके इस्तीफ़े की मांग एक बार फिर ज़ोर पकड़ने लगी है.

हालाँकि मुख्यमंत्री ने मल्लापुरम में मीडिया को जारी एक पंक्ति के बयान में कहा, "मैं इस्तीफ़ा नहीं दूंगा."

घूस लेने के आरोपों के बाद राज्य सरकार ने इस मामले की जाँच के लिए जस्टिस शिवराजन आयोग का गठन किया था.

सरिता नायर ने जस्टिस शिवराजन आयोग के सामने दिए बयान में कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी के माध्यम से चांडी को 1.9 करोड़ रुपए की रिश्वत दी और ऊर्जा मंत्री अर्यादन मोहम्मद को बतौर घूस 40 लाख रुपए दिए.

अदालत के आदेश के बाद विपक्षी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ़) को कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ़) पर हमला बोलने का मौका मिल गया है.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता एमए बेबी ने बीबीसी से कहा, "यूडीएफ़ को तुरंत सत्ता से हट जाना चाहिए."

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सोलर घोटाला पिछले ढाई साल से यूडीएफ़ सरकार की छवि ख़राब कर रहा है. शुरुआत में ये सरिता नायर और बिजु राधाकृष्णन के आसपास घूम रहा था. दोनों पर कई कारोबारियों और अनिवासी भारतीयों को धोखा देने का आरोप लगा है.

आरोप है कि ये लोग कारोबारियों से पैसा इकट्ठा करते थे और उन्हें भरोसा दिलाते थे कि उन्हें ऊर्जा परियोजनाओं में साझेदार बनाया जाएगा. इन लोगों पर धोखाधड़ी के 33 मामले दर्ज किए गए हैं.

बुधवार को सरिता नायर ने न्यायिक जाँच आयोग के सामने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय में रिश्वत दी थी. दिसंबर 2015 में राधाकृष्णन ने आयोग को बताया था कि उन्होंने मुख्यमंत्री को 5.5 करोड़ रुपए की रिश्वत दी.

मुख्यमंत्री चांडी भी जाँच आयोग के सामने उपस्थित हुए थे और उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया था.

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