हेमा को करोड़ों की ज़मीन कौड़ियों में

  • 29 जनवरी 2016
हेमा मालिनी

भाजपा सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी को मुंबई के ओशिवारा उपनगर में 2000 वर्ग मीटर ज़मीन महज़ 70000 रुपए में आबंटित की गई है.

यह चौंकानेवाली जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को प्राप्त दस्तावेज़ों से सामने आई है.

इससे पहले, कांग्रेस सांसद और मौजूदा आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला की पत्नी अनुराधा प्रसाद की कंपनी बीएजी फ़िल्म्स को भी सस्ते रेट पर भूखंड देने के मामले में सियासी माहौल गरमाया था. बाद में बीएजी फिल्म्स ने वह भूखंड सरकार को वापस कर दिया था.

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Image caption अनिल गलगली को मिली चिट्ठी की प्रति

अनिल गलगली ने मुंबई उपनगर के ज़िलाधिकारी कार्यालय से हेमा मालिनी नृत्य-नाटक अकादमी को दिए गए भूखंड की जानकारी मांगी थी.

कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जो भूखंड अकादमी को आबंटित किया गया है वह दरअसल गार्डन के लिए आरक्षित है. यह भूखंड अकादमी को सिर्फ़ 35 रुपए प्रति वर्ग मीटर के रेट पर दिया गया है.

यह आबंटन वर्ष 2016 में हुआ है लेकिन सरकार ने इसके लिए 1 फरवरी 1976 के मूल्यांकन का आधार लिया है. उस वक्त प्रति वर्ग मीटर का रेट 140 रुपए था.

हेमा मालिनी को इस रेट पर 25 प्रतिशत का ही दाम देना होगा, यानी सिर्फ 35 रुपए प्रति वर्ग मीटर ही देना होगा.

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Image caption अनिल गलगली को मिली चिट्ठी की प्रति

इससे पहले हेमा मालिनी की अकादमी के लिए अंधेरी तालुका के वरसोवा में 4 अप्रैल 1997 को भूखंड आबंटित किया गया था.

उस वक्त अकादमी ने 10 लाख रुपए अदा किए थे. लेकिन ज़मीन का कुछ हिस्सा सीआरज़ेड (समुद्र तटीय इलाक़ा जहां निर्माण कार्य प्रतिबंधित होता है) के अंतर्गत होने से वहाँ कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सका था.

अकादमी ने 6 जुलाई 2007 को सरकार से वर्सोवा स्थित भूखंड की जगह कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की.

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सरकार ने गार्डन के आरक्षित क्षेत्र से 2000 वर्ग मीटर जगह अकादमी को आबंटित कर शेष जगह पर प्रस्तावित गार्डन का विकास उनके ट्रस्ट द्वारा करने का प्रस्ताव रखा था.

ग़ौर करने वाली बात यह है कि अकादमी आज तक कुल प्रोजेक्ट ख़र्च की 25 प्रतिशत रकम भी इकट्ठा नहीं कर पाई है. इसके बावजूद भाजपा सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और हेमा मालिनी की अकादमी को वैकल्पिक भूखंड वितरित कर दिया.

यहां तक कि हेमा मालिनी ने सरकार को अभी तक अकादमी के लिए वित्तीय ख़र्च की पूर्ति का ब्यौरा नही दिया है न ही इसके लिए मिले भूखंड को ही वापस लौटाया है.

अनिल गलगली ने बीबीसी को बताया, "इसे सरकार ने 30 जुलाई 2010 को मंजूर भी किया. सरकार ने अकादमी से कुछ मामलों की जानकारी मांगी था लेकिन अकादमी ने अभी तक सरकार को वह जानकारी नहीं दी है."

अनिल पूछते हैं, "जहाँ एक ओर भाजपा सरकार मुंबई के विभिन्न प्रयोजन के लिए आरक्षित भूखंड वापस लेने के विचार में है और वहीं सरकार भाजपा सांसद हेमा मालिनी की अकादमी के लिए आरक्षित भूखंड पर नया निर्माण करने के लिए मंजूरी देने के लिए इतनी लालायित क्यों है?"

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उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि निजी संस्था के बजाय सरकार को स्वयं पहल कर इस तरह के आरक्षित भूखंड पर सांस्कृतिक संस्थाओं का निर्माण करना चाहिए.

इस बारे में हेमा मालिनी से संपर्क करने पर उन्होंने कहा के वह इस वक्त मुंबई से बाहर है और मुंबई वापस लौटने पर ही कुछ टिप्पणी करेंगी.

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