'तस्वीर उस पल का दस्तावेज़ है'

  • 30 जनवरी 2016
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

रघु राय देश के जाने-माने फोटोग्राफ़र हैं. 1947 में पंजाब के झंग (अब पाकिस्तान में) में जन्मे रघु ने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें फ़ोटोग्राफ़र बनना है.

इमेज कॉपीरइट Preeti Mann
Image caption रघु राय के लिए फ़ोटोग्राफ़ी उनकी दुनिया है. वह मानते हैं कि तस्वीर उस पल का दस्तावेज़ है जिसे दोबारा नहीं लिखा जा सकता, जो आने वाली पीढ़ी के लिए बीते समय का इतिहास होगा.

वे सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद अपने बड़े भाई और फ़ोटोग्राफ़र एस पॉल के यहां छुट्टियों में आए और भाई के दोस्त के साथ उनके गांव घूमने चले गए. जाते वक़्त उन्होंने भाई से एक कैमरा ले लिया.

इमेज कॉपीरइट Preeti Mann
Image caption रघु अपनी हर किताब की एडिटिंग से लेकर तस्वीरों के चुनाव और कैप्शन्स पर ख़ुद काम करते हैं.

वहां रघु एक गधे के बच्चे की तस्वीर लेना चाहते थे, उन्हें देखते ही वह भाग गया.

इमेज कॉपीरइट Preeti Mann
Image caption रघु राय को संगीत और प्रकृति से विशेष लगाव है. एक वक़्त था जब वह संगीतकार बनना चाहते थे.

रघु ने उसका पीछा किया और आख़िरकार उसकी तस्वीर खींची.

इमेज कॉपीरइट Preeti Mann
Image caption उन्होंने कई नामी चेहरों को अपने कैमरे में क़ैद किया है, पर मदर टेरेसा उनमें सबसे ख़ास हैं.

वापस लौटकर जब वह तस्वीर उन्होंने अपने भाई को दिखाई, तो उन्हें बहुत पसंद आई और उन्होंने वह तस्वीर लंदन टाइम्स में भेज दी, जो अख़बार के आधे पन्ने पर रघु के नाम के साथ छपी.

इमेज कॉपीरइट Preeti Mann
Image caption रघु राय का मानना है कि कैमरा कितना महंगा या सस्ता है, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. एक फ़ोटोग्राफ़र को अपने कैमरे की तकनीकी जानकारी होनी चाहिए, बाक़ी सब नज़र का खेल है.

यहीं से रघु राय का फ़ोटोग्राफ़ी का सफ़र शुरू हुआ.

इमेज कॉपीरइट Preeti Mann
Image caption रघु का कहना है- मैंने ज़िंदगी की पढ़ाई की है. ज़िंदगी एक ऐसी किताब है, जो कहीं शुरू नहीं होती, कहीं खत्म नहीं होती. वह हमेशा आपको कुछ नया देती है.

1965 में उन्होंने 'द स्टेट्समैन' अख़बार में फ़ोटो पत्रकार और 1982 में इंडिया टुडे के लिए दस साल तक बतौर फ़ोटो संपादक काम किया.

इमेज कॉपीरइट Raghu Rai
Image caption रघु बताते हैं कि जिंदगी को पढ़ते हुए मुझे अद्भुत अनुभव हुए हैं.

इस दौरान कई मशहूर हस्तियों और जगहों की तस्वीरें उतारीं. अब तक उनकी फ़ोटोग्राफ़ी पर 18 से ज़्यादा किताबें आ चुकी हैं, जिनमें 'रघु रायज़ डेल्ही', 'द सिख्स', 'कलकत्ता', 'ताजमहल', 'खजुराहो', 'मदर टेरेसा' आदि हैं.

इमेज कॉपीरइट Raghu Rai
Image caption रघु का कहना है "बदलाव ज़िंदगी का हिस्सा है और यह बदलाव हर कला को प्रभावित करता है. बदलाव नई संभावनाएं और अनुभव देता है."

उन्होंने ग्रीनपीस के लिए भोपाल गैस त्रासदी पर डॉक्यूमेंट्री भी बनाई. 1971 में भारत सरकार ने उन्हें 'पद्म श्री' से नवाज़ा. रघु राय को अब तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं.

इमेज कॉपीरइट Raghu Rai
Image caption रघु मानते हैं कि अच्छी फ़ोटोग्राफ़ी के लिए दिमाग़ से ज़्यादा दिल से देखने की ज़रुरत होती है.

वह प्रतिष्ठित मैग्नम फ़ोटो कंपनी के लिए चुने गए पहले भारतीय फ़ोटोग्राफ़र हैं.

इमेज कॉपीरइट Preeti Mann
Image caption रघु मानते हैं कि किसी भी फ़ोटोग्राफ़र को खोजी होना चाहिए. सिर्फ़ ख़ूबसूरत तस्वीर खींचना ही मक़सद न हो. अगर आपकी खींची तस्वीर विषय की आत्मा को न दिखा पाए, तो बेअसर है.

रघु राय दिल्ली में रहते हैं और आजकल अपनी खींची तस्वीरों की नई किताब पर काम कर रहे हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार