नक्सली कमज़ोर हुए हैं या सुरक्षा मज़बूत है?

  • 5 फरवरी 2016
छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों का आत्मसमर्पण, फ़ाइल फ़ोटो इमेज कॉपीरइट CG Khabar

पूर्व आईपीएस अधिकारी और उत्तर प्रदेश के डीजीपी रह चुके प्रकाश सिंह का मानना है कि सुरक्षा बलों के दबाव में नक्सली हिंसा में कमी आई है.

प्रकाश सिंह ने बीबीसी को बताया कि बड़े पैमाने पर नक्सलियों के आत्मसमर्पण से यह आंदोलन कमज़ोर हुआ है.

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समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ साल 2015 में नक्सल प्रभावित राज्यों में पिछले 6 साल में सबसे कम हिंसा हुई है.

पीटीआई के मुताबिक़ 10 नक्सल प्रभावित राज्यों में क़रीब एक लाख अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है. इसमें आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्य शामिल हैं.

भारत के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक़ 2010 में नक्सली हिंसा में 1005 लोग मारे गए थे, जबिक 2014 में इस तरह की हिंसा में 310 लोगों की मौत हुई थी. वहीं साल 2015 में 226 लोगों की मौत नक्सली हिंसा में हुई.

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Image caption झारखंड में नक्सली हिंसा को रोकने के लिए तैनात सुरक्षाकर्मी,

प्रकाश सिंह का कहना है कि ओडिशा, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है.

उनका मानना है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने भी नक्सलियों के मुद्दे पर सुरक्षा बलों को पूरी छूट दी हुई है. इस दबाव की वजह से नक्सली हिंसा में कम देखी जा रही है.

प्रकाश सिंह कहते हैं, "यह अस्थायी है और नक्सल आंदोलन में इस तरह के उतार-चढ़ाव पहले भी आए हैं. लेकिन इसका दूरगामी असर क्या होगा, यह कह पाना मुश्क़िल है."

सिंह कहते हैं, "नक्सल आंदोलन पहले भी कमज़ोर होकर फिर से तेज़ हो गया है, क्योंकि इसके पीछे जो कारण हैं उस पर ध्यान नहीं दिया जाता है."

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उन्होंने कहा कि यह सोचना ग़लत होगा कि नक्सल आंदोलन ख़त्म हो गया है. उनका मानना है कि इस आंदोलन की ताक़त सरकारी भ्रष्टाचार और आर्थिक असमानता है.

वो कहते हैं कि जिन मुद्दों को लेकर नक्सल आंदोलन आगे बढ़ा है वो आज भी मौजूद है.

प्रकाश सिंह ने बताया कि सरकार की नक्सल नीति क्या है, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है. यह अभी तक बनकर तैयार भी नहीं हुआ है.

(बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी के साथ बातचीत पर आधारित).

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