वकील बनने की चाह थी, बनीं चर्चित नृत्यांगना

  • 7 फरवरी 2016
प्रेरणा श्रीमाली, कथक नृत्यांगना इमेज कॉपीरइट PREETI MANN

प्रेरणा श्रीमाली कथक के जयपुर घराने की जानी-मानी नृत्यांगना हैं.

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Image caption कथक राजस्थान और उत्तर भारत की नृत्य शैली है. यह काफ़ी पुरानी नृत्य शैली है.

उनका जन्म राजस्थान के जयपुर शहर में हुआ. छोटी सी उम्र में नृत्य में प्रेरणा की दिलचस्पी देखते हुए उनकी माँ ने उन्हें कथक सीखने को कहा.

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Image caption कथक नृत्य शैली में घुंघरू का महत्वपूर्ण स्थान है. इसमें तालबद्ध पदचाप, विहंगम चक्कर आदि की प्रस्तुति में घुंघरू सबसे अहम होते हैं.

उन दिनों जयपुर घराने के प्रसिद्ध कथक गुरु कुंदनलाल गंगानी प्रेरणा के दादा के पास कुंडली दिखाने आए. उनके दादा ज्योतिषी थे. तब कुंदनलाल गंगानी ने उन्हें सलाह दी कि प्रेरणा को कथक सिखाएँ.

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Image caption प्रेरणा नृत्य के साथ-साथ शास्त्रीय संगीत में भी निपुण हैं. उन्होंने पखावज का भी विधिवत प्रशिक्षण लिया है.

इस तरह प्रेरणा उनकी शागिर्द बन गईं. प्रेरणा ने नहीं सोचा था कि वह कथक नृत्यांगना बनेंगी. वह तो वकील या आईएएस अधिकारी बनना चाहती थीं.

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Image caption प्रेरणा मानती हैं कि वक़्त के साथ शैली में बदलाव ज़रूरी है. कथक ही ऐसा नृत्य है, जिसमें प्रयोग की अपार संभावनाएं हैं.

पढ़ाई पूरी होने के बाद प्रेरणा को उनके गुरु ने दिल्ली आकर कथक केंद्र में प्रशिक्षण लेने को कहा.

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Image caption प्रेरणा को टेनिस बेहद पसंद है. स्टेफ़ी ग्राफ़ उनकी पसंदीदा खिलाड़ी हैं. साहित्य और संगीत में भी उनकी गहरी रुचि है.

लेकिन उनका परिवार बेटी को इतने बड़े शहर में अकेले भेजने को तैयार नहीं था. तमाम विरोधों के बावजूद प्रेरणा दिल्ली आईं, जहां से उनकी नृत्य यात्रा शुरू हुई और आज वह एक प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं.

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Image caption प्रेरणा बेहतरीन गुरु हैं और अनुशासन को बहुत ज़रूरी मानती हैं. उनका मानना है हम जीवन भर सीखते रहते हैं.

प्रेरणा देश-विदेश के कई मंचों पर अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर चुकी हैं.

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Image caption कथक नृत्य के महत्वपूर्ण घराने हैं, जयपुर, लखनऊ और बनारस.

प्रेरणा को साल 1993 में राजस्थान संगीत नाटक अकादमी सम्मान, रज़ा फाउंडेशन पुरस्कार और साल 2009 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार समेत कई सम्मान मिले.

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Image caption तालें, तोड़े और परण कथक नृत्य के महत्वपूर्ण अंग हैं.

वे फ़िलहाल दिल्ली में रहती हैं और कथक केंद्र में बतौर कथक गुरु काम कर रही हैं.

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Image caption प्रेरणा ने कालिदास, मीरा, कबीर, ग़ालिब और विदेशी कवियों की रचनाओं पर भी नृत्य प्रस्तुतियां दी हैं.

प्रेरणा ने पाँच वर्ष की उम्र में मंच पर अपना पहला कत्थक नृत्य पेश किया था.

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