जिसके निशाने पर रहे प्रधानमंत्री !

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कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग का 55 साल की उम्र में शनिवार को निधन हो गया. सुधीर आम आदमी की ज़रूरतों, उसकी समस्याओं और उसकी बातों को बेहद शिद्दत से महसूस करते थे.

उन्होंने अपने कार्टूनों के केंद्र में हमेशा 'आम आदमी' को रखा. हालांकि उनका वह आम आदमी आरके लक्ष्मण के 'कॉमन मैन' की तरह स्थापित नहीं हो सका.

लेकिन वो आम आदमी की बातों को हमेशा उठाते रहे.

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उनकी ड्रॉइंग एकदम साफ़-सुथरी होती थी. उसमें उतनी चीज़ें ही होती थीं, जितनी अपनी बात कहने के लिए ज़रूरी हों, अतिरिक्त कुछ भी नहीं होता था.

सुधीर के कार्टूनों में ब्रश के स्ट्रोक्स काफ़ी साफ़ होते थे. वे उनमें ढेर सारे ट्विस्ट डालते थे. वे कटाक्ष करते थे.

आरके लक्ष्मण के कार्टून में तकनीकी चीज़ें ज़्यादा होती थीं लेकिन आप बहुत अधिक प्रैक्टिस न करें, तो भी तैलंग के कार्टूनों को समझ सकते हैं. यह सादगी उनके चित्रों में होती थी.

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सुधीर तैलंग की 'प्राइम मिनिस्टर' सिरीज़ बहुत ही अच्छी है. उन्होंने 10 साल तक लगभग रोज़ाना एक ही आदमी यानी देश के प्रधानमंत्री पर कार्टून बनाए.

उनकी व्यक्तिगत बातें की जाएं, तो वे बिल्कुल हीरो की तरह रहते थे. बहुत ही करीने से रहते थे. उनकी बातें बहुत ही प्रभावशाली होती थीं.

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वे पेज थ्री सर्किल में भी गए. बड़े सितारों से भी मिले, जहां बहुत लोग नहीं जा पाते.

वे अपने जूनियर कार्टूनिस्टों से बहुत स्नेह से बात करते थे, उन्हें समझाते थे.

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उनकी कार्टून प्रदर्शनी लगी, तो मैं उनसे मिला. उन्होंने मुझे प्रदर्शनी की तमाम बारीक़ियां समझाईं, मुझे काफ़ी दिशा-निर्देश दिए, मैंने उनसे काफ़ी कुछ सीखा.

वे मुझे निजी तौर पर भी बहुत ही स्नेह करते थे. पीठ पर हाथ रखकर हालचाल पूछते रहते थे.

(बीबीसी संवाददाता मोहनलाल शर्मा से बातचीत पर आधारित)

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