गवाह जो मुक़दमों में बयान से मुकर गए

मुज़फ्फरनगर

मुज़फ़्फ़रनगर की एक अदालत में 2013 दंगों के एक मुक़दमे में गवाह पलट गए जिसकी वजह से 10 मुलज़िमों को रिहाई मिल गई. इनपर एक बच्चे और उसकी चाची की हत्या का इलज़ाम था.

अपने बयान से मुकरने वाले कुल दस गवाहों मेें से पांच पीड़ितों के रिश्तेदार थे.

लेकिन गवाहों के मुकरने या बयान बदल देने का ये पहला मामला नहीं है:

बेस्ट बेकरी मुक़दमा: 2002 गुजरात दंगों के बीच हुए बेस्ट बेकरी केस में सबसे अहम चश्मदीद थीं ज़ाहिरा शेख़.

बेकरी के मालिक ज़ाहिरा के पिता थे. बेकरी मामले में शेख परिवार के सदस्यों समेत 14 लोगों की हत्या कर दी गई थी. मरने वालों में तीन हिन्दू कर्मचारी भी शामिल थे. इस मुक़दमे में 21 लोगों को मुलज़िम बनाया गया था.

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हमले में ज़िंदा बच गईं ज़ाहिरा केस की अहम गवाह थीं और मुक़दमे का पूरा दारोमदार उनकी गवाही पर था. उनके अलावा मुक़दमे में सरकारी वकील ने 73 गवाह अदालत में पेश किए थे. इनमें से 37 अपने पुराने बयान से मुकर गए.

लेकिन जब ज़ाहिरा ने अदालत में मुलज़िमों को पहचानने से इनकार कर दिया, बयान बदल दिया तो देश हैरान रह गया. सभी 21 मुलज़िम रिहा हो गए.

मुक़दमा बाद में महाराष्ट्र ट्रांस्फ़र कर दिया गया ताकि गवाहों पर कोई दबाव न डाल सके.

लेकिन ज़ाहिरा मुंबई में भी सुनवाई के दौरान एक बार फिर मुकर गईं. विशेष अदालत ने 21 मुलज़िमों में से 9 को दोषी क़रार दिया जिनमें से पांच हाई कोर्ट से बरी हो गए.

जजों ने ज़ाहिरा को अदालत को गुमराह करने और अपने बयान से मुकरने का दोषी पाया और उन्हें एक साल की सज़ा हुई.

जेसिका लाल मुक़दमा: गवाहों के बयान से मुकरने के कारण सभी अभियुक्त निचली अदालत से बरी हो गए थे.

जेसिका लाल की हत्या दिल्ली के एक बार में गोली मारकर कर दी गई थी.

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केस में नौ लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चला. कांग्रेस नेता विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा मुक़दमे में अभियुक्त थे.

कुल छह में से तीन गवाह बयान से मुकर गए थे. तीन अपनी बात पर क़ायम रहे लेकिन सबूतों के अभाव में अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया.

मामला दिल्ली हाई कोर्ट गया जहाँ मनु शर्मा समेत तीन लोगों को दोषी पाया गया. मनु को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई.

हाई कोर्ट ने 2013 में दो गवाहों पर बयान से पलटने और अदालत को गुमराह करने का मुक़दमा चलाने का आदेश दिया.

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सलमान ख़ान का हिट एंड रन मामला: सितंबर 2002 में हुई इस घटना के मुक़दमे की सुनवाई करते हुए पिछले साल मुंबई की एक निचली अदालत ने सलमान खान को पांच साल की सजा सुनाई. सलमान ने इस फ़ैसले को बांबे हाई कोर्ट में चुनौती दी, जहां से उन्हें राहत मिली.

लेकिन इस मुक़दमे में सचिन कदम नाम के एक गवाह ने पहले ही अपना बयान पलट दिया था.

इस वजह से इस मामले के सरकारी वकील को मुक़दमे में काफी परेशानी हुई. बॉंबे हाई कोर्ट ने भी सरकारी वकील के ख़ास गवाह रविंदर पाटील की गवाही पर संतुष्टि नहीं जताई. इस वजह से सलामन बरी हो गए.

अजमेर कांड: अक्टूबर 2007 में अजमेर दरगाह के निकट हुए एक बम विस्फोट में तीन लोग मारे गए थे. इस काण्ड को मालेगांव, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और समझौता एक्सप्रेस में हुए बम धमाकों की एक कड़ी माना जाता है.

जिन लोगों पर इस मामले में शामिल होने का आरोप है, उन्हें संघ परिवार से जुड़ा हुआ बताया गया था.

हालांकि आरएसएस से इससे इंकार किया था.

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अजमेर धमाके की सुनवाई के दौरान 13 गवाह अपने बयान से मुकर गए. इनमें से एक अहम गवाह हैं झारखंड में भाजपा के मंत्री रणधीर सिंह.

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