और किनकी थी 26/11 में अहम भूमिका

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नवंबर 2008 में हुए मुंबई हमलों का खास अभियुक्त पाकिस्तानी-अमरीकी डेविड कोलमैन हेडली इन दिनों शिकागो से वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए गवाही दे रहा है. उस ने मुंबई हमलों की योजना बनाने में लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के शामिल होने के दावा किया है

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हेडली ने 2011 में अमरीका में शिकागो की एक अदालत में भी सरकारी गवाह के तौर पर बयान दिया था. इससे पहले अमरीका की जेल में भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए को 2010 में तफ़्सीली बयान दिया था. मुंबई हमलों की जांच करने वाली इस भारतीय एजेंसी ने हेडली से तीन जून को पूछताछ शुरू की थी जो नौ जून को ख़त्म हुई थी

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हेडली के इन बयानों में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफ़िज़ सईद और चरमपंथी संस्था के कमांडर-इन-चीफ ज़कीउर रहमान लखवी के नाम ख़ास तौर से बार बार आते हैं. लेकिन मुंबई हमलों में लश्कर और आईएसआई के कई और सदस्यों ने अहम भूमिका निभायी थी.

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वो कौन हैं?

1. साजिद मीर उर्फ़ साजिद माजिद

26 नवंबर 2008 की रात समुद्र के रास्ते जो 10 बंदूकधारी मुंबई पर हमला करने आए थे उन्हें फोन पर कराची में लश्कर के एक ठिकाने से गाइड करने वाले तीन लोगों में साजिद माजिद आगे-आगे थे. बंदूकधारियों से बात करने का आईडिया साजिद का ही था.

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उस ने यहूदी केंद्र चबाड हाउस पर हमलावरों से बार बार कहा कि महिलाओं को मारो. हेडली के अनुसार बंदूकधारी अजमल कसाब की गिरफ़्तारी के बाद साजिद ने उसकी रिहाई के लिए चबाड हाउस के यहूदियों को रिहा करने का भी ऑफर दिया था.

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हेडली और साजिद मीर हमलों की योजना के बनाने से पहले से एक दूसरे को जानते थे. वो लश्कर का एक अहम कमांडर था. उसने लश्कर की थाईलैंड में एक शाखा भी बनायी थी. हेडली ने साजिद के बारे में बताते हुए कहा:"वो काफी चतुर था और वो लश्कर में मेरा पहला हैंडलर था."

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हमलों के बाद 2009 में हेडली जब पाकिस्तान वापस लौटा तो साजिद ने बंदूकधारियों से हुई अपनी बातचीत का ऑडियो टेप उसे सुनाया था.

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2. अबू अलकामा और अबू क़हाफ़ा

मुंबई हमलों के दौरान बंदूकधारियों से बातें करने वाले तीन लोगों में साजिद मीर के इलावा अबू अलकामा और अबू क़हाफ़ा भी शामिल थे. अलकामा ताज होटल के हमलावरों को हिदायत दे रहा था. हेडली के अनुसार अलकामा ताज के बंदूकधारियों को "मेरे वीर" कह कर उनका प्रोत्साहन कर रहा था जिसे वो तकिया कलाम की तरह इस्तेमाल कर रहा था".

3. अब्दुर रहमान हाशिम उर्फ़ पाशा

पाशा शुरू में लश्कर से काफी क़रीब था और हेडली के काफी क़रीब भी था. वो पाकिस्तानी फ़ौज से रिटायरमेंट ले चुका था और हेडली के अनुसार वो एक कट्टर जिहादी था. हेडली कहता है कि पाशा लश्कर के कमांडरों को ट्रेन करता था और एक ज़माने में लखवी और उसके बीच कमांडर इन चीफ के पद के लिए मुक़ाबला भी हुआ करता था

मुंबई हमलों से कुछ पहले उस ने लश्कर से नाता तोड़ डाला लेकिन भारत पर एक और हमले के इरादे से नहीं. उसने हेडली को मार्च 2009 में भारत भेजा.

ये हेडली का भारत का नौवां दौरा था. उसका मिशन था दिल्ली में रक्षा भवन , डिफेन्स कॉलेज और देश भर में यहूदियों के चबाड हाउस पर हमले करवाना. हेडली ने उसे इन जगहों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर दिया. उत्तेजित हेडली ने उससे कहा कि डिफेन्स कॉलेज पर हमले से जितने भारतीय सैनिक मरेंगे उतने युद्ध में भी नहीं मरे होंगे.

4. मेजर इक़बाल

एनआईए की 34 घंटों की पूछ ताछ के दौरान हेडली की बातों से ये साफ़ समझ में आता है कि मुंबई हमलों में उसका सब से अधिक साथ मेजर इक़बाल ने दिया था.

मेजर इक़बाल ने उसे भारत के दौरों के लिए पैसे भी दिए और उसकी ट्रेनिंग का इंतज़ाम भी कराया. हेडली के अनुसार मेजर इक़बाल आईएसआई में मेजर के पद पर था और लश्कर में उसका बहुत असर था

मेजर इक़बाल के बारे में हेडली की राय ये थी कि वो बहुत पेशेवर था और अपने काम को गंभीरता से लेता था.

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5. मुज़म्मिल बट

मेजर इक़बाल के इलावा अगर हेडली किसी को क़रीब से जानता था तो वो था मुज़म्मिल बट. वो ज़कीउर रहमान का, हेडली के शब्दों में, एक "चमचा" था. ज़की उस पर पूरा भरोसा करता था. उसका क़द 6 फ़ीट 4 इंच था और लम्बी दाढ़ी रखता था. उसका संबंध पाकिस्तान के गुजरांवाला शहर से था

उसका लश्कर में एक अपना ग्रुप था. मुंबई के हमलों की योजना में उसने एक अहम भूमिका निभायी थी. लश्कर के ज़रिए भारत पर सभी हमलों की ज़िम्मेदारी मुज़म्मिल की थी.

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हेडली के अनुसार मुज़म्मिल ने अक्षरधाम मंदिर पर हमले की योजना भी बनायीं थी और उसे अंजाम भी दिलवाया था.

ये वही मुज़म्मिल है जिससे हेडली ने इशरत जहाँ के बारे में पहली बार सुना था.

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