रामायण परीक्षा में अव्वल फ़ातिमा ने क्या कुछ सीखा?

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हिंदू धर्म ग्रंथों का अध्ययन करने वाले मुसलमान बच्चों में नया नाम है 15 साल की फ़ातिमा राहिला का.

फ़ातिमा पिछले साल नवंबर में एक निजी संस्थान भारतीय संस्कृति प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित परीक्षा में 93 प्रतिशत अंकों के साथ अव्वल आई हैं.

फ़ातिमा राहिला की कामयाबी इसलिए ख़ास है कि वे कर्नाटक में धार्मिक असहिष्णुता और तनाव का प्रतीक बन चुके पुट्टर ज़िले से आती है.

वे पुट्टर के सर्वोद्य उच्च विद्यालय में 9वीं कक्षा में पढ़ती हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, ''हमारे टीचर ने बताया कि जो भी रामायण की परीक्षा में शामिल होना चाहता है, अपना नाम दे. ये जुलाई की बात है. मैंने अपना नाम दे दिया. सभी मेरे रिज़ल्ट से बहुत ख़ुश हैं.’’

स्कूल के प्रधानाध्यापक एचडी शिवरामू का कहना है, ''हमें उस पर गर्व है. वो एक मेधावी छात्रा है. वो न केवल पढ़ाई में बल्कि दूसरी गतिविधियों में भी आगे है. इस परीक्षा में जिन 39 बच्चों ने हिस्सा लिया, उसमें दो मुसलमान थे.’’

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शिवरामू ने बताया कि ये परीक्षा राज्य स्तरीय नहीं है बल्कि तालुका स्तर पर ही होती है.

फ़ातिमा के पिता इब्राहिम एक फैक्ट्री में काम करते हैं. वे बताते हैं, '' वह मेरे पास आई और बताया कि वो इस परीक्षा में हिस्सा लेना चाहती है. उसके चाचा यानी मेरे भाई ने भी उसे परीक्षा देने के लिए प्रोत्साहित किया.’’

लेकिन फ़ातिमा ने रामायण पढ़कर हिंदू धर्म के बारे में क्या जाना?

फ़ातिमा झट से बोल उठी, ''सच्चाई हर धर्म का आधार है.’’

लेकिन फ़ातिमा के क़दम यहीं रुकने वाले नहीं. उसने अपना अगला लक्ष्य तय कर लिया है. अब वह महाभारत की परीक्षा देना चाहती है. हालांकि इसमें एक रुकावट है.

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स्कूल उन बच्चों को इन परीक्षाओं में शामिल होने की इजाज़त नहीं देता जिन्हें 10वीं कक्षा की परीक्षा देनी होती है. लेकिन फिर भी फ़ातिम ने उम्मीद नहीं छोड़ी है.

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