बस्सी जैसा कोई नहीं......

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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र नेता कन्हैया कुमार की गिरफ़्तारी के बाद उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा.

बुधवार को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में उनकी पेशी से पहले वकीलों ने जम कर हंगामा किया और कई पत्रकारों और कन्हैया को पीटा. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक 5 सदस्यीय कमीशन को कोर्ट में हालात का जायज़ा लेने के लिए भेजा.

इस पूरे वाक़ये में दिल्ली के पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी अपनी भूमिका के लिए चर्चा में रहे.

वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता कहते हैं, "बस्सी जैसी अद्भुत प्रतिभा को आईपीएस कैसे इतने दिनों तक छिपा कर रख सकी? ख़ाकी की वर्दी में शोले के जेलर असरानी से अधिक हंसाने वाले कोई और व्यक्तित्व अब तक नहीं था."

आनंद नाम से एक ट्विटर हैंडल का कहना है, "पहले सबूत का बजाये ढोल, बस्सी की खुल गई पोल!"

बस्सी के पद से सेवानिवृत होकर केंद्रीय सूचना आयुक्त बनाए जाने की संभावना पर साहिल कहते हैं, "तरक़्क़ी की सीढ़ियां चढ़ने के लिए बीएस बस्सी को मुबारकबाद, लेकिन शर्म है कि आप स्वाभिमान और सच्चाई के समर्थन की सीढ़ी में नीचे लुढ़क आए हैं."

वहीं चंद्रकुमार ने लिखा है, ''बस्सी जैसा कोई नहीं.''

हरजिंदर ने लिखा, "जब सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि पटियाला कोर्ट के मामले में पुलिस ने कोर्ट का आदेश क्यों नहीं माना, तो पुलिस ने कहा हम नागपुर या पीएमओ से आदेश लेते हैं."

गौरव तिवारी कहते हैं, "बस्सी को अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए और किसी सर्कस से जुड़ना चाहिए. उन्हें वहीं भूमिका अधिक सूट करती है."

रितेश पूछते हैं, "क्या दिल्ली पुलिस को मूक दर्शक बने रहने की ट्रेनिंग दी जा रही है ?"

एंंजियोग्रीफ़ी नाम के एक ट्विटर हैंडल ने कहा है, "क्या आपने सुना है? बीएस बस्सी के रीढ़ की हड्डी की परीक्षा में एक नया और सुपर-लचीला पदार्थ पाया गया है इसे कहा जाता है, साइकोफैंटियम."

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