यहां राष्ट्र गान से शुरू होता है दफ़्तर का काम

  • 21 फरवरी 2016
वैशाली कलेक्ट्रेट इमेज कॉपीरइट NEERAJ SAHAI

बिहार के वैशाली ज़िले के सरकारी दफ़्तरों में रोज़ाना कामकाज की शुरुआत राष्ट्र गान से होती है.

ज़िलाधिकारी रचना पाटिल के विशेष आदेश पर ऐसा होता है.

यह आदेश इस साल एक जनवरी से ही लागू है.

इसकी पुष्टि करते हुए रचना पाटिल ने बीबीसी से कहा, "हम सब राष्ट्र निर्माण में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अपना योगदान दे रहे हैं. देशभक्ति की भावना काम करने में ऊर्जा देती है."

इसी तरह ज़िलाधिकारी ने सरकारी दफ़्तरों में जीन्स जैसे अनौपचारिक कपड़ों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है.

कोई सैंडल पहन कर भी इन दफ़्तरों में नहीं घुस सकता.

इमेज कॉपीरइट NEERAJ SAHAI
Image caption रचना पाटिल, ज़िलाधिकारी, वैशाली

पाटिल ने कहा, "आपका परिधान आपके व्यवहार को दर्शाता है. इससे बेहतर कार्य संस्कृति को बल मिलता है."

कई सरकारी अफ़सरों और कर्मचारियों ने राष्ट्रगान की पहल का स्वागत किया है.

इमेज कॉपीरइट NEERAJ SAHAI
Image caption राष्ट्रगान करते हुए वैशाली कलेक्ट्रेट के कर्मचारी

डिप्टी कलेक्टर मोहम्मद ज़फ़र आलम के मुताबिक़ इससे कर्मचारियों में अनुशासन पैदा हुआ है और वे समय पर दफ़्तर आने लगे हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "अब 98 फ़ीसदी कर्मचारी समय पर दफ़्तर पहुँच रहे हैं. यह व्यवस्था पहले ही की जानी होना चाहिए थी."

सहायक ध्रुवदेव कुमार भी उनकी बातों से सहमत हैं.

तो क्या ज़िलाधिकारी की इस पहल से सरकारी दफ़्तरों की कार्य संस्कृति भी बदल रही है?

इमेज कॉपीरइट NEERAJ SAHAI

अपने निजी कामों के सिलसिले में बाबुओं और अफ़सरों से मिलने वाले इससे पूरी तरह इत्तिफ़ाक़ नहीं रखते.

मंझौल से कलेक्ट्रेट दफ़्तर पहुँचे विनोद कुमार ने बीबीसी से कहा, "सब कुछ पहले जैसा ही है. काम में कोई बदलाव नहीं आया है. लोग समय से दफ़्तर आ जाते हैं, लेकिन हाज़िरी बनाकर उसी पुराने ढर्रे से काम करते हैं."

इमेज कॉपीरइट NEERAJ SAHAI

हाजीपुर के ओमप्रकाश यादव कहते हैं कि राष्ट्रगान का कार्यक्रम तो अच्छा है, लेकिन जनता का कोई काम संतोषजनक तरीक़े से नहीं हो पा रहा है.

महनार से आईं सुनीता देवी कहती, "मैडम हैं, तब तक राष्ट्रगान चलेगा. बाद में भी जारी रहे, तो इसका कुछ असर ज़रूर दिखेगा."

रचना पाटिल 2010 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी हैं और मूलतः छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव की रहने वाली हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार