'देशद्रोहियों और गद्दारों' के खिलाफ़ रैली

'भारत माता की जय', 'जो अफ़ज़ल के यार हैं देश के गद्दार हैं', 'देशद्रोहियों शर्म करो' और ऐसे ही कई नारों के बीच बुधवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के रामलीला मैदान से प्रदर्शन स्थल जंतर मंतर तक मार्च निकाला.

कार्यकर्ताओं के हाथों में तिरंगा और एबीवीपी के झंडे थे.

कार्यकर्ता जवाहर लाल विश्वविद्यालय में कथित तौर पर लगे नौ फ़रवरी की रात को विवादास्पद नारों से बेहद नाराज़ थे. उनका आरोप था कि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों के नेता मामले को राजनीतिक बना रहे हैं.

इससे पहले मंगलवार को हैदराबाद विश्वविद्यालय के पीएचडी छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के मामले में दलित, बुद्धिजीवी, मज़दूर और छात्र संगठनों के हज़ारों कार्यकर्ताओं ने जंतर मंतर तक मार्च निकाला था.

आज के मार्च एबीवीपी नेता विनय बिजरे ने मांग उठाई कि दिल्ली पुलिस विवादास्पद नारे लगाने वाले बाकी छात्रों को भी जल्दी गिरफ़्तार करे.

रैली में आई तारा देवी शर्मा ने कहा, "जो भी भारत के खिलाफ़ नारे लगा रहे हैं, उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए."

लेकिन ये नारा लगाना कि ‘भारत के गद्दारों को, गोली मारो सारों को’, क्या सही है, इस पर एक महिला ने कहा, “उनको उसी भाषा में समझाया जाएगा.”

उन्होंने कहा, “जब वो ऐसे नारे बोल सकते हैं जितने अफ़जल मारोगे, हर घर से अफ़ज़ल निकलेगा, तो हमारे नारे ग़लत क्यों हैं?”

एक अन्य महिला ने कहा, “भारत में रहते हैं, वंदे मातरम् नहीं बोलते. वंदे मातरम् का मतलब है हम मातृभूमि की वंदना करते हैं. इसमें ग़लत क्या है?”

रैली में शामिल एक व्यक्ति का कहना था, "जब वो लोग कह रहे हैं कि हिंदुस्तान बरबाद होगा, पाकिस्तान ज़िंदाबाद होगा, क्या हमारा इतना अधिकार भी नहीं है कि हम उन लोगों के खिलाफ़ आवाज़ उठा सकें.”

धरनास्थल जंतर मंतर पर मंच से बोलते हुए एबीवीपी की मोनिका चौधरी ने कहा कि भारत में असहिष्णुता नहीं है.

उन्होंने कहा, “एक समुदाय जो किसी ज़माने में आठ से 10 प्रतिशत था और उसको माइनॉरिटी का कोटा दिया गया था और उसके चलते उसे बहुत सारी सुख सुविधाएं मिल रही थीं आज वो बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया है, लेकिन फिर वो वही सुख-सुविधाएं माइनॉरिटी के नाम पर ले रहा है, हम फिर भी शांत हैं. ये हमारी सहनशीलता है.”

क्या ये साफ़ नहीं कि उनका इशारा किस तरफ़ था?

मोनिका ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि जब वो भाषण में तुर्कों और अंग्रेज़ों के भारत में शासन और हिंदुस्तान की गुलामी की बात करती हैं तो ये बात तथ्यों पर आधारित है और ये उनके निजी विचार हैं न कि एबीवीपी के.

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