'छात्र दाख़िले के समय संविधान में भरोसा जताएँ'

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पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने सोशल मीडिया में सवाल पूछा है कि क्या वक्त आ गया है कि छात्र विश्वविद्यालय में प्रवेश के समय आश्वासन दें कि उन्हें देश के संविधान पर भरोसा है.

हाल में जेएनयू छात्रसंघ के नेता कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है.

किरण बेदी ने ट्विटर के ज़रिए कहा, "विश्वविद्यालय भारत की एकजुटता बढ़ाने के लिए हैं, उसमें दरार डालने के लिए नहीं. इसके निर्माता हैं देश के युवा, वो इसकी तोड़ फोड़ के लिए नहीं हैं."

इसके बाद वे पूछती हैं, "युनिवर्सिटी में प्रवेश लेते समय छात्रों को आश्वासन देना चाहिए कि उन्होंने देश के संविधान को पढ़ा है और वे इस पर भरोसा करते हैं. क्या इसका वक्त नहीं आ गया है?"

इसके जवाब में कई लोगों ने उन्हें कहा है कि ऐसी परीक्षा नेताओं की होनी चाहिए.

किंग्स्ले जोसफ़ ने ट्वीट किया, "शायद हमें संविधान पर नेताओं की साप्ताहिक परीक्षा करवानी चाहिए, क्योंकि वे इसे रोज़ भूल जाते हैं."

सूर्यनारायण गणेश ने लिखा, "यदि हर व्यक्ति न्यायसंगत हो, ईमानदार और भरोसेमंद हो तो हमें न कानून की ज़रूरत होगी न सरकार की."

एक अन्य ट्वीट में किरण बेदी ने आरोप लगाया, "जेएनयू में एकता, प्रगति और खोज को बढ़ावा देने की बजाय अलगाववाद और विरोध को करदाता के धन पर क्यों बढ़ने दिया गया?"

वे कहती हैं कि जेएनयू और पटियाला कोर्ट में जो हुआ उससे सालों तक इस तरह के ग़ैर-कानूनी मामलों में कोई क़दम न उठाकर बढ़ावा देने की बात सामने आई है.

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