आर्थिक सर्वेक्षण की 5 अहम बातें

  • 26 फरवरी 2016
अरुण जेटली, वित्त मंत्री इमेज कॉपीरइट PTI

संसद में शुक्रवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण में वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान 7 से 7.50 फ़ीसदी विकास दर की उम्मीद जताई गई है.

वित्त मंत्रालय की ओर से तैयार किए गए आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर ही बजट बनाया जाता है.

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आर्थिक सर्वेक्षण की 5 अहम बातें:

1- वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान वित्तीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का 3.90 प्रतिशत तक सीमित रखना मुमकिन.

वित्तीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 3.50 फ़ीसदी के नीचे रखना ज़रूरी.

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2- कच्चे तेल की कम कीमतों के कारण महंगाई में तेज़ इजाफ़े के आसार नहीं, वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 4.5% से 5% के आस-पास रहने की संभावना.

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3-वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 1% से 1.5% के बीच संभव.

पूंजी कम आने से रुपए की क़ीमतें गिरने दी जा सकती है. चीन में मुद्रा अवमूल्यन को देखते हुए भारत को चौकस रहना होगा.

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4- कर की जद में और ज़्यादा लोगों को लाया जाए. फ़िलहाल 5.5% लोग ही कर चुकाते हैं, इसे बढ़ा कर 20% तक लाया जाना चाहिए.

5- कर छूटों को धीरे-धीरे ख़त्म कर देना चाहिए. आने वाले समय में कर उगाही बढ़ने की सभावना है.

मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में कारोबार बढ़ने का संकेत हैं. सर्वे के मुताबिक वेतन आयोग की सिफारिशों का असर महंगाई पर नहीं पड़ेगा.

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