संसद के जाम से निकलेगी जीएसटी की गाड़ी?

  • 27 फरवरी 2016
भारत, नेपाल सीमा, ट्क इमेज कॉपीरइट Getty

अमरीका की कार फ़ैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाले कार पार्ट्स भारत में बनते हैं और वहां तक पहुँचते हैं. एक वैश्विक दुनिया में यह आसान लगता तो है, पर है नहीं.

भारत की फ़ैक्ट्रियों में बनने वाले कार पार्ट्स को हज़ारों किलोमीटर दूर बंदरगाहों तक ट्रकों के ज़रिए पहुँचाया जाता है. और वहीं से गुड्स और सर्विस टैक्स (जीएसटी) का खेल शुरू हो जाता है.

भारतीय चीज़ों का दोतिहाई ट्रकों के ज़रिए लाया-ले जाया जाता है. यह एक लंबी और मुश्किल यात्रा होती है पर विश्व बैंक के अनुसार इसका सिर्फ़ 40 फ़ीसदी ही गाड़ी के चलने में लगता है.

बाकी का समय राज्य सरकार की सीमा चौकियों पर सरकारी कर चुकाने और उसकी काग़ज़ी कार्रवाई में निकलता है जो हर राज्य में अलग-अलग होती है.

बहुत से लोगों का मानना है कि जीएसटी- जो एकीकृत और आसान कर प्रणाली है- लागू करने से वास्तव में फ़र्क पड़ेगा और यह ट्रकों के सीमा चौकियों से जल्दी निकलने के मुक़ाबले ज़्यादा होगा.

हरियाणा में एक फ़ैक्ट्री से एक ट्रक सामान लेकर निकलता है जिसे राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश होते हुए तमिलनाडु पहुँचना है.

इन छह राज्यों में हरेक की सीमा पर आपको सीमा चौकियां मिलेंगी, जहां हर राज्य इस सामान पर टैक्स लगाता है, जो राज्यवार अलग-अलग होते हैं.

कार पुर्ज़े बनाने वाली कंपनी के मालिक का कहना है कि इसकी वजह से उनका उत्पाद इतना महँगा हो जाता है कि वह अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में प्रतियोगिता नहीं कर पाते.

वे कहते हैं, "जितना पैसा मैं सामान को यहां से मुंबई भेजने में ख़र्च करता हूँ, वह शायद मुंबई से अमरीका या यूरोप भेजने की लागत से ज़्यादा है. आप खुद ही कल्पना कर सकते हैं, हमें क्या दिक्कत हो रही है."

लेकिन समस्या सिर्फ़ पैसे की नहीं है.

आजकल कंपनियां कई राज्यों में छोटे गोदाम रखती हैं ताकि कर लागत कम की जा सके. मगर लॉजिस्टिक कंपनियों का कहना है कि टैक्स क़ानून में बदलाव से थोड़े और बड़े आकार के गोदाम बनाना संभव हो पाएगा जिससे आपूर्ति ज़्यादा किफ़ायती बन सकेगी.

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टीसीआई के प्रबंध निदेशक विनीत अग्रवाल कहते हैं, "साफ़ है कि जीएसटी देश में बड़ा बदलाव ला सकता है. इससे सामान की बेरोकटोक आवाजाही मुमकिन होगी. और जैसी उम्मीद की जाती है यह भारत को एक मुक्त बाज़ार बनाएगा. इससे परिवहन का समय घटेगा."

"यह मौजूदा प्रणाली के तहत पाइपलाइन (परिवहन) में रहने वाले सामान को घटाएगा. इसके साथ ही कुछ और भी फ़ायदे होंगे जैसे जीएसटी के टैक्स ढांचे का बदलना. हमारा अनुमान है कि तुरंत तो नहीं पर समय के साथ इससे लॉजिस्टिक्स की लागत 10-15 फ़ीसदी तक घट जाएगी."

हरियाणा से ट्रक के निकलने के छह दिन बाद कार के पुर्ज़े चेन्नई पहुँच रहे हैं.

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लेकिन जिस जीएसटी के परिवहन की रफ़्तार बढ़ाने, कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अधिक प्रतियोगी बनाने की उम्मीद है वह संसद की खींचतान में फंसा हुआ है.

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