विपक्ष की निराशा और सत्ता पक्ष की ख़ुशी

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को नरेंद्र मोदी सरकार का दूसरा आम बजट लोकसभा में पेश किया.

इसमें गांवों, किसानों, मज़दूरों, युवाओं और नौकरीपेशा वर्ग के लिए लुभावनी घोषणाएं की गई हैं. वहीं इस बजट के बाद से कारें, सिगरेट और ब्रांडेड कपड़े महंगे हो जाएंगे.

वित्त मंत्री का बजट भाषण पूरा होने के बाद ही विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि किसानों की आमदनी को अगले पांच साल में दोगुना करने का जो वादा इस बजट में किया गया है, उसे पूरा करना असंभव है.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा, ''बजट में ग़रीबों का कितना ध्यान रखा गया है, यह देखना होगा. मैंने तो सिर्फ़ सरकार के लोगों को बजट के दौरान मेजें थपथपाते देखा.''

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वहीं पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा, ''वित्तमंत्री ने परीक्षा पास कर ली है. इस बजट में सभी के लिए कुछ न कुछ है. अगर आप अमीरों से थोड़ा लेकर ग़रीबों को दे रहे हैं तो यह अच्छी बात है. राजकोषीय अनुशासन को बरक़रार रखना भी सही क़दम है.''

तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने कहा कि इस साल का बजट निराशाजनक है. इसमें आर्थिक सुधारों और अर्थव्यवस्था को दिशा दिखाने के लिए कोई क़दम नहीं उठाया गया है.

आप नेता आशुतोष ने सवाल उठाते हुए कहा, "इस बजट में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक कहां हैं?''

प्रधानमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के माहौल में बजट के ज़रिए व्यापक स्थिरता बरतने की कोशिश की गई है.

भाजपा के वेंकैया नायडू ने कहा, "2016-17 का बजट गांव, ग़रीब, किसान, मज़दूर और युवा के लिए है. यह एक प्रगतिशील और संतुलित बजट है."

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए अहम फ़ैसला लिया है.

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