जेटली की गुगली, पीएफ़ निकासी पर लगेगा टैक्स

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बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली की राष्ट्रीय पेंशन स्कीम (एनपीएस) और कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ़) से जुड़ी घोषणाएं कहीं ख़ुशी, कहीं गम वाली रहीं.

खुशी वाली घोषणा ये रही कि एनपीएस के तहत मिली रकम का 40 प्रतिशत हिस्सा अब टैक्स के दायरे से बाहर होगा और सिर्फ़ 60 फ़ीसदी रकम पर ही टैक्स लगेगा. पहले एनपीएस की पूरी रकम टैक्स दायरे में थी.

दूसरी तरफ़, ईपीएफ़ में अंशदान करने वाले नौकरीपेशा वर्ग के लिए बुरी खबर है. ईपीएफ़ निकालते समय अब ये राशि पहले की तरह टैक्स के दायरे से बाहर नहीं होगी, बल्कि सिर्फ़ 40 प्रतिशत राशि पर ही टैक्स छूट मिलेगी.

यानी 1 अप्रैल 2016 के बाद ईपीएफ़ में कर्मचारी के अंशदान की कुल राशि का 60 प्रतिशत टैक्स के दायरे में आएगा.

यदि किसी कर्मचारी का मासिक वेतन 15 हज़ार रुपए या इससे कम है तो उस पर ये शर्तें लागू नहीं होंगी.

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साथ ही मान्यताप्राप्त भविष्यनिधि में नियोक्ता (कंपनी) के वार्षिक अंशदान की अधिकतम सीमा डेढ़ लाख रुपए तय कर दी गई है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज बजट पेश करते हुए ऐलान किया कि नियोक्ता द्वारा ईपीएफ में दिए जाने वाले 8.33 प्रतिशत हिस्से को सरकार देगी. सरकार यह योगदान सभी नए कर्मचारियों के पहले तीन सालों की नौकरी में देगी.

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लेकिन, यहां बता दें कि यह स्कीम केवल उन लोगों के ईपीएफ़ खाते पर लागू होगी जिनकी मासिक आय 15 हजार रुपए है. बजट 2016 में नई ईपीएफ़ स्कीम के लिए एक हजार करोड़ रुपए की रकम अलग से रख दी गई है.

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