कई दिनों तक पड़ा रहा सीआईएसएफ जवान का शव

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केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ़ के जवान जोस पी जोसेफ़ का शव 6 दिनों तक ओडिशा के खोरदा में बालूगांव रेलवे स्टेशन की पटरियों के पास लावारिस पड़ा रहा.

बताया जा रहा है कि जोस 10 फ़रवरी को ट्रेन से गिर पड़े थे और वहां 16 फ़रवरी तक उनका शव वहीं पड़ा रहा.

मल्लपुरम के पुलिस अधिकारी रिचर्ड वर्गीज का दावा है कि जोस पी जोसेफ़ का शव रेलवे स्टेशन से मात्र 200 मीटर की दूरी पर था लेकिन किसी ने इसे वहां से हटाने की जहमत नहीं उठाई. ये उस जगह गए और शव को उनके घर तक पहुंचाया.

रिचर्ड वर्गीज ने बताया, “जब जोस के परिवार के सदस्यों ने उनके लापता होने की शिकायत दर्ज की तो हमने उनकी तलाश शुरू की. उनके मोबाइल नेटवर्क सिग्नल की मदद से हम बालूगांव तक पहुंचे. हमें वहां उनका शव मिला."

रिचर्ड वर्गीज बताते हैं कि ओडिशा में नज़दीक के ही एक पुलिस स्टेशन पर मामला दर्ज कराया गया लेकिन पुलिस ने कार्रवाई में देरी की.

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केरल पुलिस का दावा है कि न तो रेलवे अधिकारियों ने और न ही सीआईएसएफ़ ने जोसेफ़ के गायब होने पर उसकी तलाश शुरू की. जबकि केरल पुलिस उन्हें जोसेफ़ के मोबाइल फोन के सिग्नल और उसकी लोकेशन के बारे में उन्हें बता रही थी.

सिविल पुलिस ऑफिसर के के उदयराज भी रिचर्ड वर्गीज के साथ मामले की जांच कर रहे थे.

रिचर्ड कहते हैं कि शव को लेने और उसका पोस्टमार्टम कराने के लिए उन्हें और उनके साथियों को सभी को रिश्वत देनी पड़ी. यहां तक कि ओडिशा पुलिस को भी.

जोस असम के गोलघाट सीआईएसएफ़ यूनिट में थे. वे छुट्टियों में केरल जा रहे थे.

जोस के भाई पुलिस की टीम के साथ घटना स्थल पर गए थे.

उन्होंने कहा कि ये पोस्टमार्टम बेहद अजीब था. डॉक्टर स्थल पर गए, कुछ दूर खड़े रहे और कागज पर दस्तखत किया.

वर्गीज कहते हैं, “ओडीशा पुलिस ने सबसे पहले तो शव को छूने से मना कर दिया. बाद में, बार बार कहने पर उन्होंने शव को अस्पताल ले जाने के लिए मजदूरों को बुलाया.

पुलिस अधिकारियों ने हमें अंदर तक जाने की जाने की इजाज़त नहीं दी और कहा कि हमने सड़े हुए शव को छूआ है और अपवित्र हो गए हैं.''

वर्गीज ने कहा कि उन्हें पुलिस स्टेशन के पीछे सैप्टिक टैंक पर खड़े होकर एफआईआर पर दस्तखत करने पड़े.

खोरदा ज़िले के एसपी दिलीप कुमार दास ने बीबीसी से कहा कि शव सुनसान जगह पर पड़ा हुआ था. वहां से कोई आता-जाता नहीं था. यही वजह है कि किसी ने उस शव को नहीं देखा. लेकिन जैसे ही हमें सूचना मिली हमने तुरंत कार्रवाई शुरू की. जवान की गरिमा के मुताबिक़ सारी प्रक्रिया पूरी की गई.''

ओडिशा के रेलवे के एसपी संजय कौशल ने भी दावा किया कि रेलवे अधिकारियों ने इसलिए जवान के शव को नहीं देखा क्योंकि वह सुनसान जगह पर पड़ा हुआ था.

ओडिशा पुलिस पर यह भी आरोप लग रहे हैं कि शव को उठाने के लिए एंबुलेंस नहीं बुलाई गई.

रिचर्ड कहते हैं कि शव ले जाने के लिए भी उन्हें खुद ही गाड़ी का इंतज़ाम करना पड़ा. शव से बदबू आने लगी थी और एक टाटा सूमो में शव को किसी तरह 400 किलोमीटर दूर विशाखापत्तनम लाया गया.

खोरदा के एसपी दिलीप कुमार दास इसका खंडन करते हुए कहते हैं कि फ्रीजर की सुविधा वाली वहां कोई एंबुलेंस नहीं थी. टाटा सूमो का इंतज़ाम उन्होंने खोरदा पुलिस ने ही किया था.

रिचर्ड के मुताबिक़ केरल के डीआईजी इस मुद्दे को ओडिशा पुलिस के सामने उठा रहे हैं.

जोसेफ़ का 23 फ़रवरी को अंतिम संस्कार कर दिया गया.

कई कोशिशों के बाद भी सीआईएसएफ़ के अधिकारियों से इस मुद्दे पर जवाब नहीं मिल पाया.

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