इन्फ़ेक्शन से पीड़ित हैं छात्र: दिल्ली हाई कोर्ट

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दिल्ली हाईकोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को छह महीने की सशर्त अंतरिम ज़मानत दी है. कन्हैया कुमार गुरुवार को तिहाड़ जेल से रिहा होंगे.

कन्हैया को ज़मानत देते हुए जस्टिस प्रतिभा रानी ने आदेश की शुरुआत फ़िल्म 'उपकार' के गीत 'मेरे देश की धरती सोना उगले' से की है और कहा है कि गीतकार इंदीवर के इस गीत में मातृभूमि से प्रेम के रंग बिखरे हुए हैं.

जज के आदेश की ख़ास बातें -

1. आदेश की शुरुआत में ही जज ने पूछा है कि जेएनयू छात्रों, शिक्षकों और प्रशासन को इस सवाल का जवाब ढूंढना चाहिए कि इस वसंत जेएनयू में शांति का रंग क्यों नहीं बिखरा.

2. जज ने आदेश में कहा है कि नौ फ़रवरी को हुए कार्यक्रम के दौरान 30 नारे लगे. उन्होंने फ़ैसले में सात नारों का ज़िक्र किया है.

3. आदेश में कहा गया है कि सरकार ने अब तक इस बात पर ऐतराज़ नहीं जताया है कि कन्हैया वीडियो फ़ुटेज में नारे लगाते नहीं दिखते. हालांकि सरकारी वकील ने उनके ख़िलाफ़ गवाहों का ज़िक्र किया है.

4. आदेश में हार्दिक पटेल के ख़िलाफ़ राजद्रोह के केस का ज़िक्र किया गया है और गुजरात हाईकोर्ट की टिप्पणी को भी शामिल किया गया है.

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5. जज ने आदेश में कहा है कि छात्र संघ अध्यक्ष होने के नाते कैंपस में होने वाले किसी भी राष्ट्रविरोधी कार्यक्रम की ज़िम्मेदारी कन्हैया की समझी जाती है. वह जिस अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात कर रहे हैं, वह भारत की सीमा की रक्षा करने वाले सैनिकों की वजह से है.

6. आदेश में कहा गया है कि ये मामला देशविरोधी नारों का है, जिससे राष्ट्रीय एकता को ख़तरा होता है. नारे लगाने वाले ये भूल जाते हैं कि वो यूनिवर्सिटी के सुरक्षित वातावरण में इसलिए सांस ले पा रहे हैं क्योंकि भारतीय सेना दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र में है, जहां ऑक्सीजन भी इतनी मुश्किल से मिलती है कि अफ़ज़ल गुरु और मक़बूल बट के पोस्टर सीने से लगाकर नारे लगाने वाले एक घंटे भी न रह पाएं.

7. जज ने कहा है कि इन नारों से 'उन शहीदों के परिवारों के हौसले टूट सकते हैं, जिनके शव तिरंगों में लिपटे हुए घर पहुँचे.'

8. अदालत ने यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी पर भी अनुच्छेद 19 (2) के तहत बंदिशें लगाई गई हैं. नारों में जिन भावनाओं का ज़िक्र है उन पर उन छात्रों को विचार करने की ज़रूरत है, जिनके फ़ोटो अफ़ज़ल और मकबूल के पोस्टर के साथ रिकॉर्ड में हैं. जेएनयू शिक्षकों को भी चाहिए कि वो छात्रों को सही रास्ते पर लाएं.

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9. जज ने कहा है कि कुछ छात्रों ने जैसे नारे लगाए, वो अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार के तहत नहीं आते. ''मुझे यह एक तरह का संक्रमण लगता है, जिससे ऐसे छात्र पीड़ित हैं और महामारी बनने से पहले इसके नियंत्रण और उपचार की ज़रूरत है. जब भी किसी अंग में इन्फ़ेक्शन होता है तो पहले एंटीबायोटिक दवा दी जाती है और अगर इससे काम नहीं चलता तो फिर दूसरा उपचार होता है. कभी-कभी इसके लिए सर्जरी की जाती है. अगर इन्फ़ेक्शन की वजह से अंग इस हद तक संक्रमित हो कि गैंग्रीन हो जाए तो अंग को काटना ही अकेला उपाय बचता है.''

10. जज के मुताबिक़ न्यायिक हिरासत में रहते हुए कन्हैया ने इन घटनाओं पर विचार किया होगा और मुख्यधारा में बनाए रखने के लिए अभी उन्हें शुरुआती पारंपरिक तरीक़े से ही उपचार दिया जा रहा है और इसीलिए उन्हें छह माह की अंतरिम ज़मानत पर छोड़ा जा रहा है.

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11. जज ने कहा है कि कन्हैया के परिवार की आर्थिक हालत देखते हुए ज़मानत की रकम इतनी ज़्यादा नहीं हो सकती कि वह अंतरिम ज़मानत ही न ले पाए. हालांकि अदालत ने कहा कि कन्हैया को यह लिखकर देना होगा कि वह ऐसी किसी गतिविधि में भाग नहीं लेंगे, जिसे राष्ट्रविरोधी कहा जाए. साथ ही उन्हें कैंपस में किसी भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि पर नियंत्रण की कोशिश करनी होगी. उनकी ज़मानत देने वाला कोई ऐसा व्यक्ति या शिक्षक होगा जो न सिर्फ़ उनकी पेशी तय कर सके बल्कि यह भी ध्यान रखे कि उनके विचारों और ऊर्जा का रचनात्मक इस्तेमाल हो.

अदालत ने कन्हैया को 10 हज़ार रुपए के मुचलके पर अंतरिम ज़मानत देने का ऐलान किया है.

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