आख़िर छत्तीसगढ़ में कितने लोग मारे गए?

  • 4 मार्च 2016
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छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक के उस दावे का खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि नारायणपुर ज़िले में संदिग्ध माओवादियों ने 16 से 20 ग्रामीणों की हत्या कर दी थी.

राज्य के गृह सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने एक पत्रकार वार्ता में कहा कि नारायणपुर में पिछले एक सप्ताह में चार या पांच लोगों की हत्या की ख़बर है.

उन्होंने कहा, “नारायणपुर के अंदरुनी माड़ क्षेत्र में पिछले हफ़्ते में चार लोगों की हत्या नक्सलियों ने की है, इसकी पुष्टि की गई है. संभवतः एक और व्यक्ति की भी हत्या की गई है. इसकी पुष्टि की जा रही है.”

उन्होंने नारायणपुर के कलेक्टर और एसपी के हवाले से कहा कि पिछले दो महीनों में ज़िले में इसी तरह 20 लोगों की हत्या की गई है.

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लेकिन गृह सचिव ने साफ कहा कि इन हत्याओं के कोई भी प्रमाण सरकार के पास नहीं हैं.

उन्होंने कहा,“इस संख्या की न तो पुष्टि हो सकती है, ना ही शव बरामद किये जा सकते हैं. या तो लाशों को जलाया जा चुका होगा और परिवार के लोगों में इतनी हिम्मत नहीं होगी कि वे आकर इसकी पुष्टि पुलिस को करें.”

उन्होंने कहा कि जिन लोगों की हत्या की गई है, वे सभी पूर्व नक्सली थे.

इधर नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा ने भी गुरुवार को बीबीसी से बातचीत में साफ किया था, “अभी तक केवल चार ग्रामीणों के मारे जाने की पुष्टि हुई है. बाकि जो बातें हैं, वो ख़बरें हैं, वो अफ़वाह भी हो सकती हैं.”

इससे पहले बुधवार को बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक शिवराम प्रसाद कल्लुरी ने दावा किया था कि नारायणपुर में संभवतः 16 ग्रामीणों की हत्या कर दी गई है. इसके बाद उन्होंने 17-20 ग्रामीणों की हत्या किये जाने की बात कहते हुए मानवाधिकार संगठनों की आलोचना की थी.

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उन्होंने कहा था कि नारायणपुर ज़िले में मंगलवार सुबह तक 3 ग्रामीणों के मारे जाने की ख़बर थी, लेकिन बुधवार तक ज़िले के पुलिस अधीक्षक के हवाले से जो अंतिम सूचना आई है, उसके अनुसार मृतकों की संख्या संभवतः 16 तक पहुंच गई है.

उन्होंने कहा,“कल से मेरी एसपी नारायणपुर से बातचीत चल रही है. कल पहले मुझे खबर मिली थी कि 3 ग्रामीणों को नारायणपुर ज़िले में, अबूझमाड़ इलाके में माओवादियों ने मारा है. फिर शाम तक 3 की संख्या बढ़ कर 11 हो गई. आज सुबह जब मैं यहां आ रहा था, तब एसपी ने मुझे कहा कि संभवतः यह संख्या 16 हो गई है.”

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मानवाधिकार संगठनों को आड़े हाथों लेते हुए शिवराम प्रसाद कल्लुरी ने बुधवार को कहा था, “16 ग्रामीणों को, 16 बस्तर के आदिवासियों को माओवादियों ने मारा है... तथाकथित मानवाधिकार संगठन जो सिर्फ़ आतंकवादियों, माओवादियों और प्रतिबंधित संगठनों के मानवाधिकार की बात करते हैं, वो सब जायें अब अबूझमाड़. ये 16, 17, 20 आदिवासियों को जो मारे हैं, उनका कोई मानवाधिकार नहीं है?”

लेकिन बस्तर में 18 सालों तक काम कर चुके हिमांशु कुमार का कहना है कि बस्तर में सरकार और पुलिस बड़े औद्योगिक घरानों के लिए आदिवासियों की ज़मीन पर कब्ज़ा करने के लिए आदिवासियों पर अत्याचार कर रहे हैं. इन मामलों को उठाने वाले मानवाधिकार संगठनों पर भी सरकार और पुलिस बहुत बुरी तरह से हमला करती है.

हिमांशु कहते हैं, “अपनी ग़लतियां छुपाने के लिये वो बार-बार माओवादियों पर सच्चे-झूठे इल्जाम लगा कर खुद को बचाने की कोशिश करती है. जिस तरह से 20 और फिर 5 ग्रामीणों के मारे जाने का दावा किया गया, इस तरह की चीजें न केवल सरकार की नियत पर संशय पैदा करती हैं बल्कि पूरी की पूरी व्यवस्था को ठीक करने की ज़रुरत को भी रेखांकित करती हैं.”

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इधर मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल ने भी आदिवासियों की कथित हत्या के मामले को लेकर चिंता व्यक्त की है.

छत्तीसगढ़ में पीयूसीएल के अध्यक्ष डॉक्टर लाखन सिंह ने कहा कि पुलिस की पूरी कार्य प्रणाली बताती है कि वह आदिवासियों की मौत को लेकर कतई गंभीर नहीं है. उन्होंने कहा कि उनका संगठन किसी भी तरह की हिंसा के ख़िलाफ़ है.

डॉक्टर सिंह ने कहा,“पुलिस संबंधित इलाकों में जाये और सच्चाई का पता लगाये. इस तरह की झूठी बयानबाजियों से जनता में माओवादियों को लेकर और अधिक दहशत का वातावरण बनेगा. सरकार को चाहिये कि वह ऐसा अधिकारियों पर लगाम लगाये.”

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