'सफर में धूप तो होगी, चल सको तो चलो'

  • 9 मार्च 2016
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि वो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के जैसे अर्थशास्त्री नहीं हैं और इसीलिए उतने ज्ञानी नहीं है.

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के भाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने दावा किया कि किसानों की आमदनी पांच साल में दोगुना करना बिलकुल संभव है.

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के सपनों को साकार करने के लिए 'इस सरकार, उस सरकार की सोच से ऊपर उठकर' भारत को साफ़ बनाने में योगदान देना चाहिए. स्वच्छ भारत अभियान में योगदान करना चाहिए.

मोदी ने सदन के सुचारू रूप से चलने पर खुशी ज़ाहिर की.

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उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति की बातों का असर दिख रहा है और अच्छे माहौल में देशहित के लिए कई अहम बिल पास होने चाहिए. देश को जीएसटी बिल पास होने का इंतज़ार है."

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, "दो तरह के लोग होते हैं, एक काम करते हैं और दूसरे श्रेय लेते हैं. कांग्रेस ने अगर काम किया होता तो हमें जन-धन लाने की ज़रूरत नहीं होती."

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उन्होंने निदा फाज़ली की शायरी से अपना भाषण ख़त्म किया.

उन्होंने कहा, "सफर में धूप तो होगी, चल सको तो चलो. सभी हैं भीड़ में, तुम भी निकल सको तो चलो."

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