स्लम के बच्चों को क्रिकेट सिखाते हैं राजेश

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(यह बीबीसी की ख़ास सिरीज़ "हीरो हिंदुस्तानी" #HeroHindustani #UnsungIndians की सातवीं कड़ी है.)

भारत में ग़रीब घरों के बच्चे क्रिकेट के मैदान पर कुछ बड़ा करने का सिर्फ़ ख़्वाब ही देख सकते हैं.

पर केंद्र सरकार की नौकरी से रिटायर हुए राजेश पुंडीर ग़रीब बच्चों के इस सपने को सच करने में मदद करते हैं.

Image caption राजेश पुंडीर, स्लम क्रिकेट एकेडमी के संस्थापक
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पुंडीर ने पिछले अक्तूबर में दिल्ली की झोपड़पट्टी में स्लम क्रिकेट लीग की शुरुआत की. वे इसके ज़रिए झोपड़पट्टियों के बच्चों को पेशेवर ढंग से क्रिकेट सीखने में मदद करना चाहते हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, ''आप इन बच्चों को क्रिकेट खेलते देखिए. ये पेशेवर खिलाड़ियों से किसी मामले में कम नहीं हैं. उन्हें बस कोचिंग और समर्थन की ज़रूरत है.''

पुंडीर ने सात साल पहले सामाजिक काम शुरू किया. दो साल पहले उन्होंने सामुदायिक फाउंडेशन दातव्य ट्रस्ट बनाया. यह ग़ैर सरकारी संगठन वंचित महिलाओं और बच्चों की मदद करता है.

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वे अपने पिता को आदर्श मानते हैं. उनके पिता ने हमेशा ग़रीबों और वंचितों की मदद की.

बीते साल वे एक झोपड़पट्टी में गए, जहां उन्होंने कुछ बच्चों को घिसे हुए बल्ले और गेंद से बग़ैर किसी साज़ो-सामान के क्रिकेट खेलते देखा.

उन्होंने बीबीसी से कहा, ''उस दिन जब हम दफ़्तर लौटे, हमने इस पर सोचा कि ग़रीब बच्चों की मदद कैसे की जाए. समान विचार वाले कुछ लोगों की मदद से काम शुरू करने लायक पैसे इकट्ठा करने में हम कामयाब रहे.''

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उन्होंने झोपड़पट्टियों के बच्चों को पेशेवर क्रिकेट का प्रशिक्षण देने के मक़सद से बीते सितंबर में स्लम क्रिकेट एकेडमी की स्थापना की.

पहला टूर्नामेंट अक्तूबर में हुआ. इसमें दिल्ली के अलग-अलग इलाक़ों की दस झोपड़पट्टियों की टीमों ने भाग लिया.

पुंडीर कहते हैं, ''यह टूर्नामेंट यादगार बन गया. इन बच्चों की प्रतिभा के सभी लोग कायल हो गए.''

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दूसरा टूर्नामेंट दिसंबर में हुआ और तीसरा इस साल अप्रैल में होगा.

आज दिल्ली के वंचित घरों के सौ बच्चे इस एकेडमी में प्रशिक्षण ले रहे हैं. यह बच्चे रोज़ाना स्कूल के बाद क्रिकेट प्रैक्टिस करते देखे जा सकते हैं.

पुंडीर ने बीबीसी से कहा, ''भारत में क्रिकेट धर्म है और क्रिकेट खिलाड़ी भगवान हैं. बच्चे इस खेल का खूब मज़ा लेते हैं. उन्हें बस प्रशिक्षण चाहिए और वे अपने आपको साबित कर दिखाएंगे.''

इस लीग में खेलने वाले दक्षिण दिल्ली की एक झोपड़पट्टी के खिलाड़ी यकायक बड़े सपने देखने लगे हैं.

Image caption अमन और उनकी मां अनीता देवी
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अमन कुमार ने बीबीसी से कहा, ''अब मेरा भी एक सपना है. मैं सचिन तेंदुलकर की तरह बनना चाहता हूँ. क्रिकेट खिलाड़ी बनने के बाद मैं अपने परिवार के लिए एक बड़ा घर ख़रीदूंगा.''

अमन की मां अनीता देवी कहती हैं, ''शुरू में मैं नहीं जानती थी कि क्रिकेट खेलने से मेरे बच्चों को फ़ायदा होगा या नहीं. पर मैं अब उनमें एक बदलाव देखती हूं. उन्होंने बीते साल के मैच में अच्छा खेल दिखाया. मुझे उम्मीद है कि इससे उन्हें वह सब मिलेगा, जो वे अपने जीवन में चाहते हैं.''

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पुंडीर कहते हैं, ''यदि इस खेल से इन बच्चों का जीवन संवरा तो मुझे वाकई खुशी होगी. फ़िलहाल तो मुझे सचमुच यह देख आश्चर्य हो रहा है कि मेरे लड़के बड़े ख़्वाब देखने लगे हैं.''

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