शंकराचार्य: श्री श्री ने विदेशी चेलों का गोमांस छुड़वाया?

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Image caption स्वामी स्वरुपानंद को कुछ लोग कांग्रेस का क़रीबी बताते हैं.

जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि दिल्ली में यमुना के किनारे आयोजित श्री रविशंकर के कार्यक्रम का आध्यात्म से कोई लेना देना नहीं था.

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा, "जो वहां पर प्रोग्राम किया है उसका उद्देश्य क्या है, वो स्पष्ट नहीं होता है. प्रेस कांफ्रेस मैंने उनकी सुनी वो उसमें ये बताते हैं कि विदेश के लोग आएंगे, विदेशी मुद्रा मिलेगी देश को, तो ये तो कोई आध्यात्मिक बात तो नहीं रही."

रविवार को समाप्त हुआ आर्ट ऑफ़ लिविंग का कार्यक्रम यमुना के किनारे आयोजित होने की वजह से विवादों में घिर गया था और नेशनल ग्रीन ट्रायबुनल ने उसपर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था.

भोपाल में पत्रकारों से बात करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि अगर सरकार को जुर्माना लगाना था तो कार्यक्रम को ही रोक देना चाहिए था.

कार्यक्रम को न रुकवाने से पर्यावरण का नुक़सान तो हो ही गया.

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने श्री रविशंकर के काम-काज पर भी सवाल उठाए और कहा कि ज्ञान सिर्फ़ अमीरों को ही नहीं बांटा जाना चाहिए.

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Image caption श्री रविशंकर के कार्यक्रम पर आयोजन के लिए आज्ञा ने लेने का आरोप था.

उन्होंने कहा, "दूसरी बात ये है कि वो जो कहते हैं सुदर्शन क्रिया, अपने लिए स्वाधिकार सुरक्षित रखा है, ये उनकी नहीं है."

उनका कहना था, "केवल अभिजात्य वर्ग को ही ज्ञान न दिया जाए, देश में ग़रीब बहुत हैं. उनको भी बताया जाए."

श्री रविशंकर के आध्यात्म के प्रचार पर शंकराचार्य का कहना था, "अगर संगीत सुनाकर, कोई अच्छी बात सुनाकर लोगों का चित्त शांत करना चाहते हैं तो उसकी कोई भूमिका होनी चाहिए. जो आदमी भूखा है, जो प्यासा है, उसको संगीत क्या अच्छा लगेगा?"

"आप दुनियां भर की बात करते हैं लेकिन जो लोग दुनियां भर से आए हैं क्या आपने उनका गोमांस छुड़ाया है. अगर वो नहीं छुड़ाया तो हिंदू संस्कृति का क्या प्रचार करेंगे."

श्री रविशंकर के कार्यक्रम में 135 देशों के लाखों लोगों के शामिल होने का दावा किया गया था.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी शंकराचार्य के निशाने पर आए.

उन्होंने सवाल किया कि "आप कहां तो कारें रुकवा रहे थे कि ये चेलगी वो नहीं चलेगी. दिल्ली का वातावरण प्रदुषित हो रहा था आप पहुंच गए वहां वाहवाही लूटने के लिए."

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ अरविंद केजरीवाल भी श्री रविशंकर के कार्यक्रम में पहुंचे थे.

यमुना के प्रदूषण को लेकर ये सवाल उठे थे कि केजरीवाल आख़िर इस मामले पर क्यों चुप रहे?

कुछ लोग स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को कांग्रेस का क़रीबी बताते हैं.

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