केरल में क्यों हो रहे हैं सियासी क़त्ल?

  • 18 मार्च 2016
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बीते मंगलवार को केरल में भारतीय यूथ कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई. पुलिस को संदेह है कि यह हत्या राजनीतिक वजहों से की गई है.

केरल में राजनीतिक हत्याओं का लंबा इतिहास रहा है. यहां कांग्रेस और वामपंथी कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें होती रही हैं.

बीते कुछ साल से बीजेपी भी राज्य की राजनीति पर अपनी पकड़ बनाने की कोशिश में है.

राज्य में विधानसभा चुनाव 16 मई को होने हैं. ऐसे में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और तीखे होने के आसार हैं.

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Image caption भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता सुनील कुमार की केरल के अलापुज़्हा ज़िले में बीते मंगलवार को हत्या कर दी गई.

केरल का कन्नूर ज़िला एक ऐसा इलाक़ा है, जहां आरएसएस और भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के बीच होने वाली बदले की कार्रवाइयों के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं.

अभी तक कितनी राजनीतिक हत्याएं हुई हैं, इसका कोई स्पष्ट आंकड़ा तो नहीं, पर अनुमान है कि पिछले दो-तीन दशकों में यह संख्या 186 से 200 के बीच या इससे भी अधिक रही है.

1980 के दशक को सबसे अधिक हत्याओं वाले दशक के रूप में बताया जाता है. हर संगठन का दावा है कि उसने अपने सबसे अधिक कार्यकर्ता खोए हैं.

सीपीएम नेता एमवी जयराजन का कहना है कि 1940 के दशक से अब तक उनके 161 साथी मारे गए हैं. जयराजन फ़िलहाल कन्नूर ज़िला प्रभारी भी हैं, क्योंकि इस यूनिट के महासचिव न्यायिक हिरासत में हैं.

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Image caption माकपा के ज़िला सचिव एमवी जयराजन

आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या की जांच जब सीबीआई को सौपी गई, तो कन्नूर में पी जयराजन ने कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.

कुछ साल पहले ख़ुद जयराजन पर भी आरएसएस कार्यकर्ताओं ने हमला किया था.

राजनीतिक मामलों के एक जानकार का कहना है, "आप सहज ही यह अनुमान लगा सकते हैं कि दो-तीन महीने के भीतर एक-दो हत्याएं और होने वाली हैं."

पिछले हफ़्ते आरएसएस कार्यकर्ता पीवी बीजू स्कूली बच्चों को अपने ऑटो में स्कूल छोड़ने जा रहे थे, तभी उनकी हत्या कर दी गई. इसके लिए सीपीएम कार्यकर्ताओं को ज़िम्मेदार माना गया.

बीजू पर आरोप है कि पिछले महीने एक सीपीएम कार्यकर्ता पर हुए हमले में वे शामिल थे.

पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों के सामने उनकी हत्या को बहुत बर्बर माना गया था.

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Image caption भाजपा कार्यकर्ता पीवी बीजू पर कथित तौर पर सीपीएम कार्यकर्ताओं ने हमला किया था.

लेकिन नवंबर 2007 में सीपीएम के एमके सुधीर कुमार की हत्या भी स्कूली बच्चों के सामने ही हुई थी.

इस बदले की आग में केवल कार्यकर्ता ही नहीं झुलस रहे, बल्कि नेता भी नहीं बख़्शे जा रहे. इनमें केटी जयकृष्णन मास्टर का नाम प्रमुख है.

1999 के दिसंबर में जयकृष्णन को उनके छात्रों के सामने ही मार डाला गया था. वह बीजेपी युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष थे.

कन्नूर में बीजेपी के ज़िला सचिव पैलियानान्नूर चंद्र की 1995 में हत्या कर दी गई थी.

असल में आरएसएस उन गांवों में पैठ बनाना चाहती है, जहां सीपीएम का पूरी तरह क़ब्ज़ा है.

यह बात पुरानी हो चुकी है कि कन्नूर के जिस गांव पर सीपीएम का क़ब्ज़ा हो, वहां विरोधी दल के लोग चुनाव प्रचार भी नहीं कर सकते.

इस राजनीतिक किलेबंदी को तोड़ने में संघ पूरा ज़ोर लगा रहा है.

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तिरुअनंतपुरम से प्रगीत परमेशरन ने ख़बर दी है ख़ुफ़िया रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार 2006 से अब तक 105 कार्यकर्ता राजनीतिक झड़पों में मारे जा चुके हैं.

इनमें 51 वाम मोर्चा और 34 बीजेपी आरएसएस के थे. अकेले कन्नूर ज़िले में 42 हत्याएं हुईं.

कथित तौर पर 45 राजनीतिक हत्याएं सीपीएम ने और 38 हत्याएं बीजेपी-आरएसएस ने की हैं.

2012-1016 की प्रमुख राजनीतिक हत्याएं-

नेडुमकंडम अनीश रंजन (इडुक्की): एसएफ़आई के 23 साल के इस नौजवान की 18 मार्च 2012 को चाकू मारकर हत्या कर दी गई. पहले यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर संदेह गया. बाद में पता चला कि दो सीपीएम कार्यकर्ताओं ने ही उनकी हत्या की थी.

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साजिन मोहम्मद (तिरुअनंतपुरम): 30 अगस्त 2013 को एक कॉलेज में एसएफ़आई और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प के दौरान बम हमले में मारे गए.

नरायनन नायर (तिरुअनंतपुरम): छह नवंबर 2013 को आरएसएस कार्यकर्ताओं के समूह ने सीपीएम के नारायनन नायर की हत्या कर दी.

विनोद कुमार (कन्नूर): एक दिसंबर 2013 को सीपीएम मार्च निकाल रही थी. उसी दौरान सीपीएम कार्यकर्ताओं ने आरएसएस कार्यकर्ता विनोद कुमार पर जानलेवा हमला किया.

कथिरूर मनोज (कन्नूर): तीन सितंबर 2014 को कथित तौर पर सीपीएम कार्यकर्ताओं के हमले में आरएसएस कार्यकर्ता मनोज की मौत हो गई. इस मामले में वरिष्ठ सीपीएम नेता पी जयराजन पुलिस हिरासत में हैं.

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केके रंजन (कन्नूर): सीपीएम कार्यकर्ताओं की ओर से की गई पत्थरबाज़ी में सिर पर गहरी चोट लगी और एक दिसंबर को उनकी मौत हो गई.

ओनियान प्रेमन (कन्नूर): 26 फ़रवरी 2015 को एक बीजेपी कार्यकर्ता के हमले में सीपीएम कार्यकर्ता प्रेमन की मौत हो गई.

केवी मोहम्मद कुन्ही (कन्नूर): तीन नवंबर 2015 को सीपीएम और आल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के कार्यकर्ताओं में झड़प के दौरान एक बम विस्फ़ोट में लीग के नेता कुन्ही की मौत हो गई.

सुजीत (कन्नूर): 19 फ़रवरी 2016 को आरएसएस कार्यकर्ता सुजीत की उनके परिवार के सामने ही कथित सीपीएम कार्यकर्ताओं ने गला काटकर हत्या कर दी.

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