'अब्बा, आपने सना मीर का कॉन्फ़िडेंस चेक किया'

  • 21 मार्च 2016
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इस वक़्त जब सारे दक्षिण एशिया पर क्रिकेट का बुख़ार चढ़ा हे, किसी भी विषय पर बात करना मौत को गले लगाना है.

अब यही देख लीजिए कि मुलतान में कल एक नौजवान जिसकी शादी को मुश्किल से साल भी नहीं हुआ था, टीवी से चिपका बैठा था.

उसकी पत्नी ने अचानक कहा कि मैच-वैच छोड़ो, तुमने वादा किया था कि इतवार को मेरे कपड़े ख़रीदने चलोगे. अब चलो ना वर्ना मार्केट बंद हो जाएगी.

नौजवान ने कहा ख़ुद चली जाओ इस वक़्त बड़ी गंभीर समस्या है. आफ़रीदी ना टिका तो सबको लस्सा लग जाएगा.

पत्नी ने उसके हाथ से रिमोट कंट्रोल छीनकर टीवी बंद कर दिया और पैर पटकती चली गई. मगर जाते-जाते पीछे से आख़िरी आवाज़ ये सुनी, "कमीनी मैं तुझे तलाक़ देता हूं, तलाक़, तलाक़. "

अब भला ये भी कोई बात हुई कि मैंने अपने बेटे से कहा कि मियां जब तुम बाहर निकलो तो मेरे लिए भी पाइप का तंबाकू लेते आना.

बिना मेरी तरफ़ देखे हुए कहता है, "बाबा मैच फंसा हुआ है. मैं तो आपसे कहने वाला था कि बाहर जाएं तो मेरी सिगरेट भी लेते आइएगा."

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बेटी से पूछा कि मेरा जूता कहां है बच्चे. कहने लगी, "अब्बा, आपने सना मीर का कॉन्फ़िडेंस चेक किया."

मैं उसे अचरज से देखने लगा. "अरे अब्बा मैं पाकिस्तानी विमेन टीम की कप्तान की बात कर रही हूं. ज़रा सुनिए तो क्या कह रही है प्रेस कांफ्रेस में, वॉऊ."

बाहर निकला और जनरल स्टोर पर गया तो सारे लौंडे टीवी से बंधे हुए थे. मैंने बस इतना ही कहा कि भाई साहब, मुझे पाइप का तंबाकू......एकदम से तीनों लौंडे ने मुंह पर ऊंगली रखकर आवाज़ निकाली, "शश्श्श्श्शश्श अंकल, मैच चल रहा है."

कुछ देर बाद उनमें से एक को शायद तरस आ गया. टीवी पर से आंखे हटाए बिना बोला, "चचा मियां पहले सेल्फ़ पर तंबाकू रखा है, वहां से ले लो. पैसे काउंटर पर रख जाना या कल दे देना."

मैंने सोचा कि इन लौंडों के मुंह इस समय क्या लगना. अच्छा भला मुझे जानते भी हैं लेकिन इस समय पागल हुए पड़े हैं.

बाहर निकलकर रिक्शे को हाथ दिया. इससे पहले कि मैं बताता कहां जाना है, बोला साहब इंडिया जीत रहा है या पाकिस्तान.

मैंने कहा कि मुझे नहीं पता. रिक्शावाला फटीफटी आंखों से ऐसे देखने लगा कि जैसे मैं मंगल ग्रह से अभी-अभी गिरा हूं.

फिर कहने लगा, "साहब मैंने पाकिस्तान की जीत पर सौ रुपए का शर्त लगाया है इसलिए पूछ रहा था. बुरा ना मानना."

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मैं उसे जवाब दिए बग़ैर रिक्शे में बैठ गया और कहा कि गोलमार्केट चलो. गोलमार्केट में उतरते ही मैंने पैसे देने के लिए जेब से बटुआ निकाला तो उसने बोला, "साहब, पाकिस्तान जीत जाएगा ना. मैंने सौ रुपया...."

वैसे तो कल मुझे अपना बिजली का बिल ठीक कराने जाना है. उसके बाद प्रॉपर्टी टैक्स भरना है और फिर सोच रहा हूं कि बहुत दिनों से जाफ़री साहब की तरफ़ नहीं गया. वक़्त मिला तो चक्कर लगा लूंगा.

मगर अब मैं इनमें से कुछ भी नहीं करुंगा क्योंकि और कोई भी तो कुछ नहीं कर रहा.

अब मैं कम से कम दो हफ़्ते कोई चिंता नहीं करूंगा. बस अकेले कमरे में टीवी के सामने बैठकर अबे यार, वाह क्या हिट है, स्लो-स्लो खेलो, जल्दी क्या है, ये युवराज कब आउट होगा, आफ़रीदी के बच्चे एक बार तू नज़र तो आ जा, करता रहूंगा.

सारे काम और मेल-मुलाक़ात गए भाड़ में. हां, तो भईया अब अगला मैच किन-किन का है?

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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