'रोहित, अंबेडकर, भगत सिंह के सपने पूरे करेंगे'

  • 23 मार्च 2016
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Image caption जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर पहली बार रोक लगाई गई है. वे हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित करने के लिए गए थे लेकिन विश्वविद्यालय ने बाहरी लोगों के प्रवेश पर ही रोक लगा दी.

भारी पुलिस बल से घिरे कन्हैया कुमार यूूनिवर्सिटी गेट के बाहर सिर्फ़ छात्रों के एक छोटे समूह को ही संबोधित कर पाए.

यूनिवर्सिटी में दाख़िल होने की इजाज़त नहीं दिए जाने पर कन्हैया ने कहा, ''एक छात्र को यूनिवर्सिटी में जाने की इजाज़त नहीं देना निंदनीय है. हमारी लड़ाई देश, लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए है. यूनिवर्सिटी पुलिस की मदद से हमें ज़रूर रोक सकती है लेकिन वो हमारे संघर्ष को नहीं कुचल सकती है. हमलोग रोहित वेमुला, बाबासाहेब अंबेडकर और भगत सिंह के सपनों को ज़रूर पूरा करेंगे.''

इससे पहले हैदराबाद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफ़ेसर अप्पा राव पोदाइल ने बीबीसी हिंदी को बताया था, "हम सिर्फ़ कन्हैया कुमार की ही बात नहीं कर रहे हैं. कार्यकारी परिषद ने यह फ़ैसला किया है कि चूंकि विश्वविद्यालय में हालात तनावपूर्ण हैं, इसलिए किसी भी बाहरी व्यक्ति को कैंपस में दाख़िल होने की इजाज़त नहीं दी जाएगी."

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प्रो. अप्पा राव ने कहा, "अगर कैंपस में हमारे छात्र इकट्ठे होकर मीटिंग करना चाहते हैं, तो इसमें हमें कोई आपत्ति नहीं है. चूंकि यूनिवर्सिटी के अंदर अशांत हालात हैं, इसलिए हम नहीं चाहते कि कोई बाहरी व्यक्ति अंदर दाख़िल हो."

उपकुलपति की अध्यक्षता में कार्यकारी परिषद ने मंगलवार को यह फ़ैसला लिया था.

कल कुछ छात्रों ने प्रो. अप्पा राव की छुट्टी से वापसी का विरोध करते हुए उपकुलपति निवास और कार्यालय में तोड़फोड़ की थी.

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दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद छात्रों के ज़बर्दस्त विरोध के चलते 24 जनवरी को प्रो. अप्पा राव छुट्टी पर चले गए थे.

हैदराबाद यूनिवर्सिटी छात्र संघ अध्यक्ष ज़ुहैल केपी ने दिन में कहा था कि वो अब भी उम्मीद में हैं कि कन्हैया छात्रों को संबोधित करेंगे.

"लेकिन अगर उन्हें प्रवेश की इजाज़त नहीं दी जाती, तो हम छात्रों से यह नहीं कह सकते कि वो कन्हैया को सुनने के लिए कैंपस के बाहर जाएं. फ़िलहाल हमारी प्राथमिकता उन छात्र नेताओं को पुलिस हिरासत से छुड़ाना है. जिन्हें मंगलवार को पकड़ा गया था.''

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Image caption रोहित वेमुला

कन्हैया कुमार के हैदराबाद पहुँचने के कुछ देर बाद ही यह सूचना यूनिवर्सिटी वेबसाइट पर लगा दी गई थी. कन्हैया कुमार ने अपने पक्ष में इतना ही कहा था कि वह "सिर्फ़ हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्रों की मीटिंग में हिस्सा लेने आए थे."

हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्र विशाल ने फ़ोन पर बीबीसी हिंदी को बताया कि ''यूनिवर्सिटी में इमरजेंसी के हालात हैं. कल (मंगलवार) सुबह से हम देख रहे हैं. सीआरपीएफ़, रेपिड एक्शन फ़ोर्स और तेलंगाना पुलिस तैनात है. हम जहां प्रोग्राम कर रहे थे, उसे चारों तरफ़ से पुलिस ने कवर कर रखा है. कैंपस में जगह-जगह पुलिस है.''

विशाल के मुताबिक़, ''कैंपस में पानी नहीं है. प्रशासन ने पानी बंद करा दिया. इंटरनेट बंद करा दिया. मेस बंद करा दिया है. यूनिवर्सिटी भी चार दिनों के लिए बंद करा दी है. कैंपस में कुछ भी करने की मनाही है. हम कोई सूचना बाहर नहीं भेज पा रहे. मीडिया को घुसने नहीं दिया जा रहा है. किसी भी बाहरी छात्र के घुसने पर रोक है. हम लोग वैकल्पिक सामुदायिक रसोई चलाने का विचार कर रहे हैं. उसे भी ये लोग बंद करना चाहते हैं.''

विशाल के मुताबिक़ उनके कुछ साथियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था जिन्हें शाम को छोड़ा गया. उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासन का कोई प्रतिनिधि छात्रों से बात नहीं कर रहा.

विशाल ने आरोप लगाया, ''नॉन टीचिंग स्टाफ़ प्रशासन के साथ खड़ा हो गया है. नॉन टीचिंग स्टाफ़ और कुछ टीचिंग स्टाफ़ पर भी वाइस चांसलर प्रो अप्पाराव का बहुत दबाव रहता है. उन्होंने अप्पा राव के समर्थन में मेस बंद कर दिया है. ये एक साज़िश है कि नॉन टीचिंग को स्टूडेंट से अलग कर दिया है ताकि रोहित मुद्दे पर हो रहा आंदोलन ख़त्म हो जाए.''

छात्र विशाल के मुताबिक़ मंगलवार शाम को ''कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था, उनमें टीचिंग स्टाफ़ को छोड़कर छात्रों पर हत्या की कोशिश जैसे आरोप लगाए गए हैं.. जब भी ज्वाइंट एक्शन कमेटी का कोई सदस्य दिखता है, तो उसे गिरफ़्तार करने की कोशिश हो रही है.''

वेमुला और चार अन्य छात्रों को हॉस्टल से निलंबित कर दिया गया था, जिन्होंने पुलिस में प्रो. अप्पा राव के ख़िलाफ़ आत्महत्या के लिए उकसाने की शिकायत दर्ज कराई थी.

रोहित की आत्महत्या पर विवाद के बाद कई राजनीतिक नेता हैदराबाद यूनिवर्सिटी कैंपस गए थे और उन्होंने छात्रों को संबोधित भी किया.

इनमें कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कम्यूनिस्ट पार्टी नेता सीताराम येचुरी शामिल थे.

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