ये 5 राज्य बताएँगे, मोदी का करिश्मा कायम या ग़ायब

  • 27 मार्च 2016
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भारत के पांच राज्यों में अगले महीने विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं.

ये चुनाव सत्तारूढ़ भाजपा के लिए दो कारण से बहुत महत्वपूर्ण हैं- एक तो इसलिए कि इनमें से एक भी राज्य में भाजपा सत्ता में नहीं है और दूसरे यह कि भाजपा एक लंबे समय से इन राज्यों में अपने राजनीतिक क़दम जमाने की कोशिश कर रही है.

इन चुनावों से यह अनुमान होगा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार स्थापित होने से बीजेपी को इन राज्यों में कोई राजनीतिक फ़ायदा पहुंच रहा है या नहीं.

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पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की क्षेत्रीय पार्टी तृणमूल कांग्रेस सत्ता में है. वो कम्युनिस्टों की पैंतीस साल पुरानी सरकार को हटा कर सत्ता में आई थीं. राज्य में अब कम्युनिस्ट कमजोर पड़ चुके हैं.

कांग्रेस और कम्युनिस्ट एक अनौपचारिक सहमति के साथ चुनाव लड़ रहे हैं. पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में पहली बार 16 प्रतिशत मतदाताओं ने भाजपा को वोट दिया था.

एक समय ऐसा लगने लगा था कि मोदी की लोकप्रियता बंगाल में भाजपा को सत्ता में ला सकती है, लेकिन कुछ ही महीनों में मोदी की लोकप्रियता का प्रभाव तेजी से कम होने लगा. अब पश्चिम बंगाल में बीजेपी का सारा संघर्ष राज्य में पैर जमाने तक सीमित है.

बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सारी शक्ति असम चुनाव में केंद्रित रखी है. यहां कांग्रेस बीते 15 साल से सत्ता में है और बीजेपी यह उम्मीद कर रही है कि लोगों में बदलाव की इच्छा से राज्य में बदलाव आ सकता है. बीजेपी ने यहां दो क्षेत्रीय दलों से गठबंधन कर रखा है.

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यहाँ अन्य सामान्य विकास के साथ साथ बांग्लादेश से गैर कानूनी तरीके से आप्रवासियों को राज्य में आने से रोकने का सवाल महत्वपूर्ण है. बीजेपी उसे एक जज़्बात और राष्ट्रवाद का रंग देने की कोशिश कर रही है. वर्तमान में राज्य में स्थिति स्पष्ट नहीं है कि हवा किसके पक्ष में है.

केरल भारत के दक्षिण की सबसे आखिरी सीमा का राज्य है और वहां अतीत के मुताबिक एक बार कांग्रेस और एक बार कम्युनिस्ट मोर्चा सत्ता में आते रहे हैं. यहाँ मुसलमानों और ईसाइयों की कुल संख्या पचास प्रतिशत से ज़्यादा है.

बीजेपी वर्षों से यहां अपना प्रभाव जमाने की कोशिश कर रही है. पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस और कम्युनिस्ट दोनों ही कमजोर हुए हैं. राज्य में लोगों में बदलाव की जबरदस्त इच्छा है लेकिन क्या बीजेपी ऐसा विकल्प बन सकती है? स्थिति स्पष्ट न होने के कारण, ये तो आगे ही पता चलेगा.

तमिलनाडु में जयललिता की एआईडीएमके पार्टी सत्ता में है. बीजेपी यह आशा कर रही थी कि मुख्यमंत्री जयललिता के साथ उसका गठबंधन हो जाएगा, लेकिन वह नहीं हुआ. अब वह अकेले चुनाव लड़ रही है.

पुड्डुचेरी एक छोटा राज्य है और वहां कांग्रेस और अन्ना द्रमुक की सरकारें बनती रही हैं.

इन राज्यों में भाजपा के जीतने की उम्मीद बहुत कम है. बीजेपी पर इन राज्यों में हार का कोई सीधा असर तो नहीं पड़ेगा लेकिन दूसरे दलों की जीत से विपक्ष को प्ररेणा मिलेगी. वहीं नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार मनोवैज्ञानिक तौर पर कमज़ोर होगी.

बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनावी चुनौती अगले साल आएगी जब देश के दो अहम राज्यों उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनाव होंगे. भाजपा और विपक्षी दलों ने अभी से ही इन राज्यों के लिए सारी तैयारियां शुरू कर दी हैं.

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पंजाब में दिल्ली की तरह अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी एक बड़ी राजनीतिक ताक़त बनकर उभर रही है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए यह पार्टी एक सियासी चुनौती बन सकती है.

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