'हरीश रावत सरकार 31 को बहुमत साबित करें'

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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के तीसरे दिन नैनीताल हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि निवर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत 31 मार्च को बहुमत साबित करने का मौक़ा दिया जाय.

कांग्रेस ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के केंद्र सरकार के फ़ैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी. इस मामले में कांग्रेस की तरफ से पैरवी कर रहे पार्टी के प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “अदालत ने मुख्यमंत्री हरीश रावत और राज्यपाल दोनों का ही ये मत स्वीकार किया है कि हरीश रावत को सदन में बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाए. क्योंकि राज्यपाल ने हरीश रावत को 28 तारीख को विश्वासमत हासिल करने के लिये कहा था. साथ ही नौ विधायकों का मत भी बहाल रखा गया है. जब उन विधायकों की सदस्यता के बारे में अदालत का फ़ैसला आ जाएगा तो उस मुताबिक उनके मत का मूल्य तय होगा.”

उत्तराखंड की संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश ने इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा,“एक बात ये महत्त्वपूर्ण है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि राष्ट्रपति शासन 24 घंटे पहले लगा और हमें बहुमत साबित करने का मौका नहीं दिया, और अब अदालत ने वो मौका दे दिया.”

उधर कांग्रेस के बाग़ी विधायकों के नेता पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा है, “इस फ़ैसले को हार-जीत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिये. अदालत का फ़ैसला आया है और हम उसका सम्मान करते हैं. हरीश रावत की सरकार अल्पमत में है और सदन में ये साबित हो जाएगा.”

हाईकोर्ट के फ़ैसले के अनुसार रजिस्ट्रार जनरल इस पूरी प्रक्रिया में अदालत की तरफ से पर्यवेक्षक के तौर पर मौजूद रहेंगे.

फिलहाल 71 सदस्यीय विधानसभा में हरीश रावत 34 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे हैं.

मौजूदा स्थितियों में अगर अदालत में सुनवाई के बाद 9 बाग़ी विधायकों की सदस्यता कायम रह जाती है और उनका मत हरीश रावत के ख़िलाफ़ जाता है तो हरीश रावत की सरकार जा सकती है. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

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