जोड़ियां जिनकी मोहब्बत ऑनलाइन परवान चढ़ीं

  • 31 मार्च 2016
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स्मार्टफ़ोन और डेटिंग एप्स जैसी चीजें भारत के पारंपरिक जोड़ी बनाने के तरीक़े में बदलाव ला रहे हैं.

सिमोन मेबिन ने ऐसे तीन जोड़ों से बात की जो ऑनलाइन एक-दूसरे से मिले और हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो गए.

रेल के एक सफ़र के दौरान लड़का और लड़की चोरी-चोरी एक-दूसरे को देख रहे थे और फिर नज़र दूसरी तरफ कर लेते थे. लड़का सोच रहा था कि लड़की ने यह ध्यान नहीं दिया कि वह उसे चोरी-चोरी देख रहा है और लड़की भी कुछ ऐसा ही सोच रही थी.

रीयल लाइफ़ के इस रोमांस के दौरान बस एक ही आवाज़ सुनाई पड़ रही थी और वो थी... पूर्वी भारत से गुज़र रही उस ट्रेन की छुक-छुक की आवाज़ जिसमें ये दोनों बैठे थे. उस समय राहुल की उम्र 27 साल की थी जबकि वर्षा 22 की थीं.

वर्षा अपनी मोहक मुस्कान के साथ कहती हैं, "मैं अपनी चाची के घर से लौट रही थी, उस समय उसकी दादी भी उसके साथ थीं, हमने एक-दूसरे के परिवार के बारे में बातचीत शुरू की... फिर क्या हुआ मुझे नहीं पता, लेकिन मैं उसमें दिलचस्पी लेने लगी."

वर्षा ने राहुल की दादी से बात की, लेकिन राहुल से नहीं और राहुल ने भी उससे बात नहीं की.

राहुल बताते हैं, "मैं उससे बात करने की हिम्मत नहीं कर पाया, उस समय उसकी मां और भाई दोनों ही उसके साथ थे."

भारत में बहुत सारे लोग विपरीत लिंग के अनजान लोगों से बात करना ठीक नहीं मानते हैं. लेकिन आज बातचीत शुरू करने के कई तरीक़े मौजूद हैं.

वर्षा कहती हैं, "मुझे लगा कि वो एक अच्छा इंसान है और मैं उससे दोस्ती करना चाहती थी, इसलिए मैंने उसे फ़ेसबुक पर ढूंढना शुरू किया".

वर्षा राहुल का नाम भी नहीं जानती थीं, लेकिन वो इतना जानती थीं कि वो कहां काम करता है और उसकी बहन का नाम क्या है. फ़ेसबुक पर राहुल तक पहुंचने के लिए इतनी जानकारी काफ़ी थी.

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उन दोनों ने चैटिंग शुरू की फिर फ़ोटो की लेन-देन शुरू हुई. उस वक़्त एक-दूसरे से बात करने की जगह मैसेज करने से दोनों के बीच पनप रहे इस नए रिश्ते को छिपाकर रख पाना आसान था.

वर्षा कहती हैं, "हम सबके सामने एक दूसरे से बात नहीं कर सकते थे."

यहां तक कि अपने बेडरूम को छोड़कर वर्षा अपने स्मार्टफ़ोन की चमक से भी घबराती थी. उन्हें डर था कि कहीं इससे उनके परिवार को शक न हो जाए कि वह क्या कर रही हैं. राहुल बताते हैं कि वर्षा कंबल के नीचे छिपकर रहती थी.

ऑनलाइन चैटिंग करते हुए एक महीने गुज़र जाने के बाद दोनों एक दूसरे से छिपकर मिलने लगे. इसके पीछे केवल यही वजह नहीं थी कि दोनों डेटिंग कर रहे थे, जो आज भी भारत में बुरी बात मानी जाती है, बल्कि राहुल और वर्षा दोनों अलग-अलग जाति के थे.

भारत के ज़्यादातर इलाक़ो में इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती कि अलग-अलग जाति के लड़के-लड़की एक दूसरे से प्रेम करते हों.

इस रोमांटिक रेल सफ़र से एक महीने पहले, बेंगलुरू में एक और प्रेम कहानी शुरू हुई थी और इस बार फ़िज़ाओं में बॉलिंग पिन की आवाज़ गूंज रही थी.

गरिमा कहती हैं, "जिस समय कुमार फ़र्श पर गिरा था, हर कोई उसे देखने के लिए ठहर गया".

अपनी आंखों में एक अनोखी चमक लिए गरिमा कहती हैं, ''तुम 'द बिग लेबोव्स्की' थे''.

उस समय दोनों ही 'फ़्लो' के आयोजित एक बॉलिंग नाइट में थे. यह एक ऑनलाइन डेटिंग सर्विस है जो अरैंज मैरिज पसंद नहीं करने वाले अविवाहितों के लिए कार्यक्रम आयोजित करती है.

कुमार से प्रभावित होने के बाद गरिमा ने अगले दिन उन्हें मैसेज कर साथ में जूस पीने का ऑफ़र दिया.

उसके बाद दोनों कई बार एक-दूसरे से मिले. फिर गरिमा ने फ़ैसला किया कि वो अपनी मां से कुमार के बारे में बात करेंगीं, इसके बावज़ूद भी कि गरिमा और कुमार दोनों के धर्म अलग थे. कुमार एक हिन्दू हैं जबकि गरिमा जैन परिवार से संबंध रखती थीं.

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अगली बार जब गरिमा अपने माता-पिता से मिलीं तो यह साफ़ हो गया कि उनका नया रिश्ता घर में बहस का मुद्दा है.

गरिमा बताती हैं कि उनके पिताजी आगबबूला हो गए थे. उनके पिताजी ने अपने भाई की मदद से कुमार की ऑनलाइन जासूसी करवाई और उसके बारे में सारी जानकारी इकट्ठा की.

उसके बाद गरिमा से उनके पिता ने कहा, "तुम उस आदमी के साथ नहीं रह सकती, वह एक मांसाहारी है और शराब भी पीता है".

जैन धर्म में शाकाहार का बड़ा महत्व होता है और गरिमा के परिवार में किसी ने भी जैन धर्म के बाहर शादी नहीं की थी.

यहां से क़रीब एक हज़ार मील दूर दिल्ली में एक और आधुनिक प्यार पनप रहा था. बच्चों के खेलकूद और कुत्तों के भौंकने की आवाज़ के बीच 30 साल के नितिन अपने मां-बाप के साथ ग्राउंड फ़्लोर के एक फ़्लैट में रहते हैं. फ़ेसबुक पर समय बिताते हुए उनकी नज़र एक विज्ञापन पर पड़ी. यह 'ट्रूली मैडली' का विज्ञापन था, जो कि भारत में सबसे प्रसिद्ध डेटिंग ऐप है.

नितिन बताते हैं, ''मेरे माता-पिता मेरे लिए लड़की तलाश रहे थे, इसलिए मैंने सोचा क्यों न इस ऐप को एक बार आज़माया जाए''.

एक और शहर में नितिन से कम उम्र की श्रुति ने भी इसी विज्ञापन को देखा. माता-पिता से को छोड़ उन्होंने भी एक साथी की तलाश शुरू की. उन्हें भी अपने प्यार को खुद हासिल करने का विचार पसंद आया.

श्रुति बताती हैं, "मैंने जब यह सोचा, उसके 10-12 दिनों के बाद ही नितिन से बातचीत शुरू कर दी, हमने उस डेटिंग एप पर एक-दूसरे को कुछ संदेश भेजे और फिर एक दूसरे से मिलने की इच्छा जताने लगे. हमारी पहली मुलाक़ात के बाद ही यह स्पष्ट था कि ये वही है, जिसकी मैं तलाश कर रही हूं. इसलिए मैंने आगे बढ़कर इस लड़के को अपने लिए छांट लिया."

एक ही मुलाक़ात और तेज़ रफ़्तार रोमांस के बाद कार्ड पर उनकी शादी की तारीख़ भी छप गई. उनका परिवार भी एक-दूसरे से तुरंत ही मिला और दोनों और यह जानकर खुशी थी कि उनकी जाति और धर्म भी एक ही थे.

लेकिन वास्तव में श्रुति और नितिन ने अपने माता-पिता से यह सच छिपाया था कि दोनों की मुलाक़ात कैसे हुई थी.

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श्रुति कहती हैं, "अगर आप डेटिंग ऐप से अपना जीवनसाथी चुनते हैं, तो आपके माता-पिता को कभी भी ऐसा नहीं लगेगा कि आप एक अच्छा जीनवसाथी पाएंगे, उन्हें लगता है लोग केवल झूठे रिश्तों के लिए वहाँ मौजूद होते हैं. लड़के या लड़की वहाँ एक-दूसरे के साथ कुछ समय बिताते हैं और फिर अलग हो जाते हैं."

नितिन इस बात को दो पीढ़ियों के अंतर के रूप में देखते हैं.

शादी के कुछ ही महीने पहले सगाई के बड़े समारोह तक दोनों ही परिवारों को यह नहीं पता था कि ये लोग एक-दूसरे से कैसे मिले, क्योंकि यह बात काफ़ी पुरानी हो चुकी थी इसलिए दोनों तरफ से इसका कोई विरोध नहीं हुआ.

लेकिन आगबबूला हो रहे पिता और 'टेनपिल बॉलर्स' की जगह पर पाए प्यार की वजह से गरिमा के लिए सबकुछ इतना आसान नहीं था.

गरिमा और कुमार को यह लगा कि अपने परिवार को समझाने के लिए उन्हें सगाई कर लेनी चाहिए ताकि उन्हें इस रिश्ते की गंभीरता का एहसास हो सके.

साथ ही परिवार वालों को यह भी समझाया जा सके कि धर्म का बंधन उनके लिए मायने नहीं रखता है. लेकिन यह केवल एक शुरुआत थी, ये लोग परिवार की रज़ामंदी के बिना विवाह नहीं करना चाहते थे.

गरिमा बताती हैं, "मुझे देखना था कि मैं पहले किसे मना सकती हूं और फिर एक की मदद से परिवार के बाक़ी लोगों को राज़ी कर सकती हूं."

एक साल तक कोशिश करने और मनाने के बाद उनके पिताजी राज़ी हुए और उन्होंने इस शादी के लिए हाँ कर दी. उसके बाद शादी का दिन तय किया गया और शादी के ठीक एक दिन पहले ही कुमार को अपने होने वाले ससुर से पहली बार मिलने का मौक़ा मिल पाया.

लेकिन कुमार बताते हैं कि उस कमरे में उनके साथ ग़ज़ब की चालाकी की गई, वहाँ चार बुज़ुर्ग बैठे थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि ये कौन-लोग हैं? कुमार ने पहले कभी गरिमा के पिता की फ़ोटो भी नहीं देखी थी, इसलिए यह उनके लिए थोड़ी अजीब स्थिति थी.

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रेल यात्रा में एक-दूसरे से मिलने वाले वर्षा और अरूण के लिए अपने परिवार को मना पाना इससे भी मुश्क़िल था. वो लोग अपने माता-पिता को यह बता पाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए कि वो किसी अलग जाति के लड़के या लड़की के साथ रिश्ता रखते हैं. इसके बदले दोनों ही 1000 मील दूर दिल्ली भाग आए और शादी करने का फ़ैसला कर लिया.

वर्षा बताती हैं, "दो मेहमानों के साथ यह एक बहुत ही साधारण शादी समारोह था, भारत में यह किसी भी नज़रिए से बहुत ही छोटा था."

उसके बाद राहुल ने अपने माता-पिता को फ़ोन किया और बताया कि वह दिल्ली क्यों आया है. उन्होंने कहा कि वह किसी से प्यार करता है और उससे शादी कर ली है.

राहुल ने बताया कि यह सब सुनने के बाद आम तौर पर उदारता से बात करने वाले उनके माता-पिता की आवाज़ में गुस्सा और निराशा झलक रही थी.

राहुल बताते हैं, "उन्होंने कहा कि मैं तुम्हारा खून कर दूंगा, तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े कर दूंगा".

राहुल और वर्षा ने इस धमकी को गंभीरता से लिया. भारत में इस तरह की तथाकथित 'ऑनर किलिंग' कोई हैरत की बात नहीं है.

यह धमकी राहुल और वर्षा के लिए थी, लेकिन वो आज भी एक दूसरे से प्रेम करते हैं. वो भी अपने माता-पिता को बाक़ी दोनों दम्पतियों के परिवारों की तरह प्यार करते हैं. वो अपने माता पिता को समझाना चाहते हैं कि नई पीढ़ी और स्वतंत्र विचारों वाले सशक्त युवा भारतीयों के लिए प्यार का मतलब क्या होता है.

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