फ्लाईओवर के मलबे के बीच ग़म और ग़ुस्सा

इमेज कॉपीरइट AP

कोलकाता में गुरुवार को गिरे एक निर्माणाधीन फ्लाईओवर के मलबे को हटाने का काम अब भी जारी है.

शुक्रवार की सुबह विशेष बचाव दलों ने कंक्रीट के मलबे और मुड़ी हुई इस्पात के ढेर से एक और शव निकाला है. इस तरह इस हादसे में मरने वालों की तादात अब 23 हो गई है.

आधिकारिक रूप से अब और शवों के मिलने की आशंका से तो इंकार नहीं किया जा रहा है, लेकिन मलबे में कुछ और शव होने के बारे में फिलहाल पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है.

इमेज कॉपीरइट EPA

अधिकांश मलबा हटा दिया गया है, फिर भी जिस चौराहे पर गुरुवार दोपहर फ्लाईओवर गिरा था वहां अब भी काफी मलबा पड़ा है.

ये जगह भारत के व्यस्तम शहर कोलकाता के सबसे व्यस्त इलाक़ों में से एक है. आस पास कुचली और जली मोटरसाइकिल, टूटे ऑटो-रिक्शा के बचे टुकड़े, लावारिस पड़ा हैंडबैग और फटे हुए कपड़े पर लहराता बैनर दुर्घटना की गंभीरता बयां कर रहे हैं.

वॉलेंटियर जगह जगह राहत और बचाव कार्य में लगे लोगों को गर्म मीठी चाय और बिस्कुट खिला रहे हैं.

इमेज कॉपीरइट AP

बचाव अभियान को देखने के लिए जुटी भीड़ में कौतुक भरा उत्साह है पर वहीं रोष और ग़ुस्सा भी है.

लोग जानना चाहते हैं कि क्यों एक सीधा-सादा निर्माण प्रोजेक्ट ऐसी भयानक आपदा में बदल गया.

इमेज कॉपीरइट AP

पश्चिम बंगाल में कुछ ही दिनों में चुनाव होने हैं. ऐसे में यह राज्य और पूरे देश में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है.

सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्यों एक ऐसी निर्माण कंपनी को फ्लाईओवर बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई जिस पर कई राज्यों में प्रतिबंध लगा हुआ है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार