पीलीभीत एनकाउंटर: 47 पुलिसवालों को उम्रक़ैद

  • 4 अप्रैल 2016
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1991 के पीलीभीत फर्जी एनकाउंटर मामले के सभी 47 दोषी पुलिसकर्मियों को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने उम्रक़ैद की सजा सुनाई है.

हालांकि मामले के याचिकाकर्ता स्पेशल कोर्ट के फ़ैसले से संतुष्ट नहीं हैं.

याचिकाकर्ता हरजिंदर सिंह काहलों ने बीबीसी हिंदी को बताया, "25 साल बाद फ़ैसला आया है, इतनी देरी के बाद इन लोगों को कम से कम फांसी होनी चाहिए, क्योंकि इन लोगों ने बेगुनाह लोगों को मारा था."

काहलों ने इस फ़ैसले पर सवाल उठाते हुए ये भी कहा, "इतना बड़ा हत्याकांड बिना एसपी, डीआईजी और आईजी स्तर के अफ़सरों के आदेश के बिन संभव नहीं है. हमें लगता है कि सीबीआई पर दबाव था और उसने तीनों बड़े अधिकारियों के नाम अभियुक्तों की सूची से बाहर कर दिए और इंस्पेक्टर स्तर तक के पुलिसकर्मियों को अभियुक्त बनाया."

उत्तर प्रदेश में ठीक 25 साल पहले, जुलाई 1991 में एक ही रात में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत ज़िले में तीन फ़र्जी एनकाउंटर हुए थे जिसमें 10 सिखों की हत्या की गई थी.

इस मामले में कुल 57 पुलिसकर्मियों पर चार्जशीट दाखिल की गई थी. सुनवाई के दौरान 10 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई.

शुक्रवार को अदालत में 20 पुलिसकर्मी मौजूद थे, जिन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. इसके अलावा 27 अन्य पुलिसकर्मियों की गिरफ़्तारी के लिए गैर ज़मानती वारंट जारी किए गए हैं.

हरजिंदर सिंह काहलों ने मृतकों के परिवार वालों को दिए गए 14-14 लाख रुपये के मुआवजे को भी बेहद कम बताते हुए इसे 50-50 लाख रुपये प्रति परिवार करने की मांग की है.

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