क्यों अलग है कश्मीरी, गैर-कश्मीरी छात्रों की राय?

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वर्ल्ड टी-20 में भारत-वेस्ट इंडीज़ मैच के दौरान श्रीनगर के एनआईटी में कश्मीरी और ग़ैर कश्मीरी छात्रों की झड़पों के बाद वहाँ ख़ासा तनाव है.

श्रीनगर में ग़ैर कश्मीरी छात्र अपनी सुरक्षा की बात कर रहे हैं और केंद्रीय मंत्रियों स्मृति ईरानी और राजनाथ सिंह ने उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया है.

भारत प्रशासित कश्मीर में ग़ैर-कश्मीरी छात्रों और भारत के अन्य राज्यों में जम्मू-कश्मीर के छात्रों से बातचीत से प्रतीत होता है कि उन्हें अलग-अलग दिक्कतों से जूझना पड़ता है.

बीबीसी हिंदी ने दोनों तरह के कुछ छात्रों से जब बातचीत की तो पाया कि भारत के क्रिकेट मैचों के दौरान अपनी-अपनी पसंद-नापसंद के कारण तल्ख़ी कुछ बढ़ जाती है, जैसा इस घटना में भी हुआ.

इन छात्रों की दिक्कतों को जानने से स्थिति कुछ हद तक समझ में आती है.

बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद ने दिल्ली में पढ़ रहे दो कश्मीरी छात्रों से बात की, जिन्होंने बताया:

दिल्ली में पढ़ने वाले दानिश आफ़ाक इसी घटना के दिन दिल्ली यूनिवर्सिटी में अपने दोस्त से मिलने गए थे. जब वो वहाँ मैच देखने पहुँचे तो पाया कि वहाँ सैकड़ों छात्र मौजूद थे.

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आफ़ाक ने बताया, ''जब उस दिन इंडिया ने मैच जीता था तो स्टूडेंट्स नारेबाज़ी करने लगे. स्टूडेंट्स ने पहले भारत माता की जय, फिर इन्क़लाब ज़िंदाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद और फिर कश्मीर मुर्दाबाद के नारे लगाए. हम चुप रहे, हमने कोई जवाब नहीं दिया क्योंकि वहां हम बहुमत नहीं थे. हमें मेरठ का मामला याद है और ये भी कि उनके साथ क्या बर्ताव हुआ."

दिल्ली में ही पढ़ रहे कश्मीर के एक अन्य छात्र ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ''देखिए, जब पाकिस्तान की बात होती है तो हमारा एड्रेनेलीन स्तर बढ़ जाता है. हम जोश में आ जाते हैं. ऐसा क्यों होता है, हमें नहीं पता. शायद वो इसलिए हो कि जिस तरह से पाकिस्तान कश्मीर के मामले को देखता है. कई कश्मीरी पाकिस्तान को अपने सेवियर (रक्षक) की तरह देखते हैं.''

दूसरा पक्ष जानने के लिए श्रीनगर में पत्रकार माजिद जहांगीर ने वहाँ एनआईटी में पढ़ने वाले एक ग़ैर कश्मीरी (पंजाबी) छात्र से बातचीत की. झगड़े वाले दिन वह इंस्टीट्यूट में नहीं थे.

नाम न बताने की शर्त पर इस छात्र ने कहा, ''छात्रों के बीच ऐसा नहीं होना चाहिए, उन्हें देश या धर्म के नाम पर नहीं बँटना चाहिए. ऐसे तनाव से हमारी पढ़ाई पर ही असर होता है.''

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वो बताते हैं, ''जब भारत मैच हार गया तो लोकल छात्र इसकी खुशी मना रहे थे. ग़ैर कश्मीरी छात्रों को इस बात पर ग़ुस्सा आ गया." उन्होंने कहा कि उन्हें कश्मीरी छात्रों से कोई डर नहीं, हालांकि मैच के कारण हालात थोड़े बिगड़े ज़रूर हैं.

श्रीनगर एनआईटी के इस ग़ैर-कश्मीरी छात्र ने कहा, ''जो छात्र नॉन लोकल हैं, उन्हें कुछ स्थानीय छात्रों की भारत के ख़िलाफ़ बात अच्छी नहीं लगती. ग़ैर कश्मीरी छात्र कई दिनों से यहां पर रह रहे हैं, लेकिन वो इस बात को खुलकर बोल भी नहीं पाते. इस कारण शायद उन्होंने तिरंगा फ़हराया.''

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