एनआईटी: अब तक क्या हुआ, 7 अहम बातें

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श्रीनगर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) में 31 मार्च से कश्मीरी और ग़ैरकश्मीरी छात्रों के बीच तनाव बना हुआ है.

भारत प्रशासित कश्मीर में श्रीनगर की एनआईटी में अब तक क्या हुआ. एक नज़र इस घटनाक्रम की 7 अहम बातों पर -

  • 31 मार्च को वेस्टइंडीज़ के हाथों भारत की हार के बाद कथित तौर पर कश्मीरी छात्र वेस्टइंडीज़ की जीत का जश्न मनाने लगे. इससे ग़ैरकश्मीरी छात्र नाराज़ हो गए और उन्होंने ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए.
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    1 अप्रैल – मामले ने तूल पकड़ा और अनेक ग़ैरकश्मीरी छात्रों ने कश्मीरी छात्रों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन और नारेबाज़ी की. कश्मीरी छात्रों ने भी आज़ादी के नारे लगाए. इससे छात्रों में झड़प हो गई और पुलिस ने आंसूगैस छोड़ी और हल्का लाठीचार्ज किया. इसके बाद एनआईटी को बंद कर दिया गया.
  • 4 अप्रैल - चार दिन बाद एनआईटी में पढ़ाई-लिखाई शुरू हुई, पर ग़ैरकश्मीरी छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया. उधर, जम्मू कश्मीर में पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती के नेतृत्व में भाजपा और पीडीपी गठबंधन की सरकार ने सत्ता संभाली.
  • 5 अप्रैल – ग़ैरकश्मीरी छात्रों के एक ग्रुप ने एनआईटी डायरेक्टर से मिलकर अपनी मांगें पेश कीं. इनमें उन्होंने सुरक्षा और लाठीचार्ज के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की.
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    मांगें सौंपने के बाद ग़ैरकश्मीरी छात्रों ने मुख्य गेट की ओर मार्च निकालने की कोशिश की पर उन्हें रोक दिया गया. पुलिस ने फिर लाठीचार्ज किया, जिसमें कुछ छात्रों को चोटें आईं. कम से कम 12 छात्र ज़ख़्मी हुए. उसी रात कैंपस में सीआरपीएफ़ की दो कंपनियां तैनात कर दी गईं.
  • 6 अप्रैल - जम्मू के वकीलों ने हड़ताल की, जिससे अदालतों में कामकाज ठप रहा. मानव संसाधन विकास मंत्रालय की दो सदस्यीय टीम कश्मीर पहुँची, जिसने अधिकारियों और छात्रों से मुलाक़ात की. टीम 13 अप्रैल तक वहां रहेगी. संस्थान में 13 अप्रैल से परीक्षाएं होनी हैं. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने छात्रों को सुरक्षा का आश्वासन दिया. अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने गैरकश्मीरी छात्रों को सुरक्षा मुहैया कराने की बात कही.
  • 7 अप्रैल - जम्मू कश्मीर पुलिस के लाठीचार्ज के ख़िलाफ़ नेशनल पैंथर्स पार्टी और श्रीराम सेना ने जम्मू में बंद रखा. जम्मू कश्मीर के उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने एनआईटी मामले की जांच के लिए एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को तैनात किया है जो 15 दिन में रिपोर्ट देंगे.

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