छत्तीसगढ़ के एक जज को भारी पड़ा फ़ैसला

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छत्तीसगढ़ के बस्तर में माओवाद प्रभावित सुकमा के चीफ़ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रभाकर ग्वाल की बर्खास्तगी के बाद उनसे संबंधित मामले की सुनवाई करने वाले मजिस्ट्रेट को भी निलंबित कर दिया गया है.

रायपुर के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी कुमार चतुर्वेदी ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश समेत राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ़ दायर याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार की थी.

लेकिन ये फैसला उन पर भारी पड़ गया है. सरकार ने उन्हें गुरुवार को निलंबित कर दिया. वहीं हाईकोर्ट ने विभागीय जांच के भी आदेश जारी किए हैं.

ये मामला प्रभाकर ग्वाल की पत्नी ने दायर किया था. ग्वाल को सोमवार को ही नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया.

इस मुक़दमे में हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस समेत नौ जजों, तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और एक प्रशासनिक अधिकारी समेत कुल 21 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था.

रायपुर के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी कुमार चतुर्वेदी ने सुनवाई के लिए याचिका स्वीकार करते हुए 18 अप्रैल की तारीख़ तय की थी.

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लेकिन इस बीच हाईकोर्ट ने अपने ही मुख्य न्यायाधीश के ख़िलाफ़ दायर इस मामले की सुनवाई पर रोक लगाते हुए पूरे मामले से संबंधित फाइलें हाईकोर्ट में तलब की.

प्रभाकर ग्वाल ने बीबीसी से कहा, "मुझे साजिश का शिकार बनाया गया है. जिस तरीक़े से मुझे सीधे नौकरी से बर्खास्त किया गया है, उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिये मैं अपने वकील से बात कर रहा हूं."

प्रभाकर ग्वाल पिछले साल जुलाई में उस समय चर्चा में आए थे, जब उन्होंने छत्तीसगढ़ में मध्यप्रदेश के व्यापमं घोटाले की तर्ज पर मेडिकल परीक्षा के मामले में फैसला सुनाया था.

इस फैसले में उन्होंने पुलिस के आला अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज करने का आदेश जारी किया था.

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प्रभाकर ग्वाल की पत्नी प्रतिभा ग्वाल का कहना है कि उनके पति सह अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के अलावा सीबीआई मजिस्ट्रेट भी थे. उनका आरोप है कि बिलासपुर से उनके पति का तबादला रायपुर किया गया था.

लेकिन इन पदों पर रहते हुये जब उन्होंने मेडिकल परीक्षा मामले का फैसला सुनाया तो उनका तबादला रायपुर से माओवाद प्रभावित सुकमा ज़िले में कर दिया गया.

आरोप है कि फैसले के बाद प्रभाकर ग्वाल को सत्तारुढ़ दल के एक विधायक ने धमकी दी थी, जिसकी रिपोर्ट स्थानीय थाने में दर्ज कराई गई.

अक्तूबर में प्रभाकर ग्वाल और आरंग इलाके में टोल टैक्स कर्मचारियों के साथ हुए विवाद के बाद ग्वाल की शिकायत पर तो मामला दर्ज हुआ लेकिन कोर्ट में अभियुक्तों के खिलाफ प्रतिवेदन तक प्रस्तुत नहीं किया गया. इसके उलट टोल टैक्स कर्मचारियों की शिकायत पर ग्वाल को उसी अदालत में उपस्थित होकर ज़मानत लेनी पड़ी, जिसमें वो कभी फ़ैसले सुनाया करते थे.

पिछले साल दिसंबर में कथित रुप से सुकमा ज़िले के कलेक्टर नीरज बंसोड़ और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रभाकर ग्वाल के बीच बातचीत का एक ऑडियो सार्वजनिक हुआ, जिसमें कलेक्टर ने कथित रुप से ग्वाल को एक मुकदमे को दर्ज करने से पहले उनसे सलाह लेने की सीख दी थी.

इस मामले को ग्वाल ने न्यायिक मामले में हस्तक्षेप मानते हुए, इसकी शिकायत ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश से की थी.

प्रभाकर ग्वाल की पत्नी प्रतिभा ग्वाल ने एक साजिश के तहत अपने पति को फंसाये जाने का आरोप लगाते हुये मार्च के अंतिम सप्ताह में रायपुर की स्थानीय अदालत में याचिका दायर की थी.

बाद में हाईकोर्ट की अनुशंसा पर राज्य शासन के कानून व विधि विभाग के एडिशनल सेक्रेटरी ने प्रभाकर ग्वाल की बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया. इस बर्खास्तगी के पीछे विभागीय जांच और जनहित को कारण बताया गया.

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