यूपी बीजेपी अध्यक्ष: मैं बरी हो चुका हूँ

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उत्तर प्रदेश के नए भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य पर हत्या का आरोप रहा है. बीबीसी से बातचीत में उनका कहना है कि उन्हें इस आरोप से बाइज़्ज़त बरी कर दिया गया है.

लोकसभा चुनाव के लिए उन्होंने मई 2014 में जो हलफ़नामा चुनाव आयोग में दाख़िल किया था, उसके मुताबिक़ उनके ख़िलाफ़ 10 आपराधिक मामले हैं.

इनमें 302 (हत्या), 153 (दंगा भड़काना) और 420 (धोखाधड़ी) जैसे आरोप शामिल थे.

हालांकि उनके बरी किए जाने संबंधी काग़ज़ात उपलब्ध नहीं कराए गए हैं.

मौर्य का दाख़िल किया गया हलफ़नामा आप यहाँ देख सकते हैं.
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने के बाद बीबीसी हिंदी के लिए पत्रकार समीरात्मज मिश्र ने केशव प्रसाद मौर्य से टेलीफ़ोन पर बात की.

उन्होंने केशव प्रसाद मौर्य से सवाल किया, ''लोकसभा चुनाव में आपके दिए शपथपत्र में आपके ख़िलाफ़ 10 मामले हैं. 302 का मामला और दूसरे कई और गंभीर मामले भी हैं. इन मामलों के साथ जब आप और आपके नेतृत्व में पार्टी जनता के सामने जाएंगे तो क्या आपको नुक़सान नहीं होगा या फिर कैसा इंप्रेशन जाएगा?''

इस पर केशव प्रसाद मौर्य का कहना था, ''नहीं...नहीं. आप जो मुक़दमे मेरे ख़िलाफ़ देख रहे हैं, वो सभी आंदोलन के दौरान के हैं. 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव थे, तब मैं इलाहाबाद में रहता था. बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी को जिताने के लिए मेरे ख़िलाफ़ तत्कालीन एक मंत्री ने एक थानेदार के साथ मिलकर साज़िश रची थी और मुझे जेल भिजवाया था. उस मुक़दमे का निर्णय हो चुका है और मैं उसमें बाइज़्ज़त बरी हो चुका हूँ. जहाँ तक दूसरे मुक़दमों का सवाल है, वो सारे मुक़दमे आंदोलन के हैं. सार्वजनिक जीवन में रहने के कारण जनता, नौजवानों और किसानों के हित में आंदोलन करना मैं अपनी ज़िम्मेदारी मानता हूँ. मैं अभी बहुत सारे आंदोलन करूँगा और हो सकता है और मुक़दमे लिखे जाएं.''

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Image caption केशव प्रसाद मौर्य की ओर से चुनाव आयोग को दिया गया हलफनामा

बीबीसी के लिए पत्रकार अतुल चंद्रा से बातचीत में प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य के मीडिया प्रभारी आशीष गुप्ता ने कहा कि ''केशव प्रसाद मौर्य के ख़िलाफ़ चल रहे क़त्ल के मुक़दमे में उनको बरी कर दिया गया है. 2015 में उन्हें कौशांबी ज़िला न्यायालय ने हत्या के आरोप में निर्दोष पाया था और बरी कर दिया था.''

आशीष गुप्ता ने बताया कि जो अन्य नौ मुक़दमे मौर्य के ख़िलाफ़ हैं, वो अभी चल रहे हैं.

केशव प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश की फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं, यह वही फूलपुर है, जहां से नेहरू कभी चुनाव लड़ा करते थे.

केशव प्रसाद मौर्य सोशल मीडिया पर ख़ासे सक्रिय हैं. उनका नाम राष्ट्रीय या प्रदेश की राजनीति में ज़्यादा चर्चित नहीं रहा.

ऐसे में उन्हें भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई की कमान सौंपने के क्या कारण हैं.

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इस पर वरिष्ठ पत्रकार राजकिशोर कहते हैं, "मुझे लगता है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जिस तरह से पार्टी और संगठन में फ़ैसले हुए हैं वो आमतौर पर चौंकाने वाले हैं. चाहे वो हरियाणा में मुख्यमंत्री का चयन हो, चाहे महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री का चयन हो."

उत्तर प्रदेश में ऐसा लग रहा था कि मायावती की काट के लिए भारतीय जनता पार्टी पिछड़े या दलित चेहरे को आगे लाएगी. ये तय हो चुका था कि सवर्ण चेहरा उसके लिए जिताऊ नहीं हो सकता है.

संघ और भारतीय जनता पार्टी दोनों का ही नेतृत्व इस मामले में एकमत था.

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राजकिशोर कहते हैं, "भारतीय जनता पार्टी का पूरे हिंदी बेल्ट में हिंदुत्व के साथ पिछड़े वर्ग का जो कॉम्बिनेशन है, वो हमेशा क्लिक करता रहा है. चाहे उत्तर प्रदेश में पहले कल्याण सिंह रहे हैं या मध्य प्रदेश में उमा भारती रही हों चाहे शिवराज चौहान रहे हों."

केशव प्रसाद मौर्य कोइरी जाति से आते हैं.

विश्व हिंदू परिषद के पूर्णकालिक सदस्य भी रहे हैं. एक और दिलचस्प बात ये भी है कि वे कभी चाय भी बेचते रहे हैं.

राजकिशोर कहते हैं, "भारतीय जनता पार्टी पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 में से 73 सीटें ला चुकी है. उसमें प्रधानमंत्री मोदी का हिंदुत्व, पिछड़ा और चायवाला का ही कॉम्बिनेशन हिट रहा है."

वे कहते हैं, "केशव प्रसाद मौर्य इतने अनुभवी नेता नहीं हैं कि मायावती या मुलायम के बराबर खड़े हों. ये मानकर चलना पड़ेगा कि उत्तर प्रदेश में भी चेहरा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही होगा. छवि पुख्ता करने में केशव प्रसाद काम आएंगे."

उनका कहना है, ''इस ग़लतफ़हमी में केशव प्रसाद भी नहीं होंगे कि वह अपनी अलग टीम बना पाएंगे. बहुत सी चीज़ें केंद्र से तय होती हैं. इसलिए बहुत बड़ा चेहरा भी नहीं लाया गया है. माना जाता है केंद्रीय नेतृत्व जैसा चाहेगा उनसे इम्पलीमेंट कराया जाएगा.''

यानी यूपी में अगर भारतीय जनता पार्टी कामयाब हुई, तो जीत मोदी और शाह की होगी लेकिन पराजय हुई तो मौर्य को उसमें हिस्सा बँटाना होगा.

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