धीरे-धीरे शराब का नशा उतारेंगी जया

  • 9 अप्रैल 2016
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तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने सत्ता में वापसी के बाद चरणबद्ध ढंग से राज्य में शराबबंदी का वादा किया है.

राज्य में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और उनकी इस घोषणा में महिला मतदाताओं को रिझाने और विपक्ष को सत्ता से दूर करने की कोशिश नज़र आती है.

जयललिता ने अपने चिरप्रतिद्वंद्वी डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि पर शराबबंदी का अपना वादा पूरा न करने का आरोप लगाया है.

जयललिता का कहना है कि करुणानिधि की डीएमके सरकार ने ही चार दशक पहले शराब पर पाबंदी ख़त्म की थी.

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चेन्नई में एक विशाल जनसभा में जयललिता ने कहा, ''मेरी नीति पूरी तरह से शराबबंदी लागू करना है लेकिन एक दस्तख़त से ऐसा नहीं हो सकता. ऐसा केवल चरणबद्ध तरीक़े से ही हो सकता है.''

तमिलनाडु को शराब बिक्री से सालाना क़रीब 30,000 करोड़ रुपए की आमदनी होती है.

जयललिता की घोषणा पीएमके नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए रामदास की पिछले साल शुरू हुई उस मुहिम के बाद आई है, जिसमें उन्होंने शराबबंदी के खिलाफ़ अभियान शुरू किया था. इसके बाद डीएमके समेत कई अन्य पार्टियों ने यह मुद्दा लपक लिया था.

बहरहाल, अपने पहले चुनावी भाषण में ही जयललिता ने जो वादा किया है, विश्लेषक उसे बेहद 'स्मार्ट' क़दम मान रहे हैं.

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जयललिता पर किताब लिखने वाली राजनीतिक विश्लेषक वासंती कहती हैं, ''यह बेहद स्मार्ट क़दम है. जयललिता को पता था कि विपक्षी दल इस मुद्दे को पकड़ेंगे. सरकार ने विपक्षी दलों की आलोचना पर अभी तक कोई जबाव नहीं दिया है. यदि जबाव दिया होता तो लगता कि उनकी सरकार पर इसके लिए दबाव है.''

वे कहती हैं, ''जयललिता अब पार्टी प्रमुख के नाते विपक्ष के चुनावी प्रचार की धार ख़त्म कर रही हैं. यह अलग बात है कि वह अपनी घोषणा गंभीरता से लागू कर पाएंगी या नहीं. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि शराब से जो राजस्व मिलता है, उसी से वे कई कल्याणकारी योजनाओं को धन दे पाई हैं.''

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