'कहानी सुनाना चाहता हूँ, कहानी बनना नहीं'

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मैं ये मानता हूँ कि मुझ पर लोगों का अब जितना ध्यान गया है, उससे मैं थोड़ा असहज महसूस कर रहा हूँ.

मैं बस एक क्रिकेट कमेंटेटर हूँ. मैं मैच देखने जाता हूँ, जो होता है उसकी कहानी सुनाता हूँ. जहां संभव होता है ख़ुशी खोज लेता हूँ, ये महसूस करते हुए कि मुझे ऐसा करने का मौका मिला. मैं क्रिकेट से जुड़ी कहानी सुनाता हूँ, ख़ुद कहानी नहीं हूँ.

हालांकि मुझे जो संदेश मिले हैं, उससे मैं अभिभूत हूँ. मैं गदगद हूँ कि जो लोग मुझे जानते नहीं उन्होंने भी इस मसले पर अपने विचार व्यक्त किए हैं.

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मेरे बच्चों की उम्र के युवा पुरुषों और महिलाओं ने सलाह दी हैं. मशहूर व्यक्ति और साधारण क्रिकेट प्रेमियों ने भी सार्वजनिक मंच साझा किए हैं.

और मैं खासकर उन लोगों से प्रभावित हूँ जो मेरे पक्ष में बोल रहे हैं और कह रहे हैं कि वे मुझे कमेंटेटर के रूप में नहीं आंकते.

(आप किसी से असहमत हो सकते हैं लेकिन उनके बोलने के हक़ के लिए लड़ते हैं. ये बात मुझे अपने जीवन के शुरुआती दिनों में ही पता चल गई थी)

यह घटना मुझे बताती है कि हम उस खेल की कितनी परवाह करते हैं, जिसे हम इतने प्यार से खेलते-देखते हैं.

मुझे नहीं पता कि आगे क्या होगा. मेरा अनुबंध स्टार स्पोर्ट्स के साथ है, जिसके साथ मेरे बेहतरीन रिश्ते हैं. इस अनुबंध के तहत तो आईपीएल में कमेंट्री शामिल नहीं है.

मैं ऐसा इसलिए करता हूँ कि क्यों मैं वास्तव में क्रिकेट की प्रयोगशाला का हिस्सा बनना चाहता हूँ कि वहां क्या तैयार हो रहा है. यह एक बेहतरीन टूर्नामेंट है.

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मैं अब भी ये नहीं जानता कि मैं आईपीएल क्यों नहीं कर रहा हूँ. मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है.

मैं ये तथ्य स्वीकार करता हूँ कि लोग मुझे पसंद नहीं करते लेकिन मैं सचमुच उम्मीद करता हूँ कि ऐसा इसलिए नहीं क्योंकि क्रिकेटरों को शिकायत है कि मुझे क्या कहना चाहिए.

मैं हर सुनने वाले युवा क्रिकेटर से कहता हूँ कि हम हर चीज़ पर कभी सहमत नहीं होंगे, लेकिन मेरी हमेशा इच्छा रही है कि वे अच्छा करें कि मैं उन्हें रन बनाने, विकेट लेने या कैच पकड़ने से नहीं रोक सकता.

ये उनका काम है और उन्होंने क्या किया या क्या नहीं किया, ये बताना मेरा काम है.

मेरी सबसे बड़ी आलोचना है कि मैं इसमें बहुत कुछ नहीं करता. और जब मैं करता हूँ, मेरे मित्र प्रेम पनिकर तय नहीं कर पाते कि मैंने उस खिलाड़ी की खिंचाई की है या तारीफ़!

इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद. मुझे अपने काम से प्यार है और आपकी प्रतिक्रियाएं जबर्दस्त हैं, लेकिन मैं कहानी कहने वाला ही बना रहना चाहता हूँ, खुद कहानी नहीं बनना चाहता.

(क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने लोगों की प्रतिक्रियाएं देखते हुए फ़ेसबुक पर अपना बयान दिया है)

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