इतनी मौतों का ज्योतिष के पास क्या है जवाब?

  • 11 अप्रैल 2016
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ज्योतिष का बुनियादी सिद्धांत है कि हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है, इंसान के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति के हिसाब से ही जीवन चलता है और मौत होती है.

तो सवाल ये उठता है कि केरल में कोल्लम मंदिर में एक साथ इतने लोगों की मृत्य एक ही वक़्त, एक ही दिन कैसे हो गई?

क्या उन सबकी कुंडली में ग्रहों की स्थिति एक जैसी थी? या सबके हाथ की रेखाएँ एक जैसी थीं?

दिल्ली के लालबहादुर शास्त्री विद्यापीठ में ज्योतिष के प्रोफ़ेसर देवी प्रसाद त्रिपाठी कहते हैं, "देखिए व्यक्ति की कुंडली अलग-अलग हो सकती है लेकिन ऐसी घटनाएं स्थान विशेष के भाग्य से भी जुड़ी होती हैं. ज़ाहिर सी बात है कि अगर उस ख़ास स्थान का भाग्य ख़राब होगा तो वहां रहने वाले लोगों का भाग्य भी उसी से जुड़ा होगा."

त्रिपाठी कहते हैं, "ऐसी घटनाओं की व्याख्या करते वक़्त व्यक्ति विशेष की बात नहीं हो सकती. ऐसे में तो हमें उस जगह, उस भूखंड की किस्मत का विचार करना होगा."

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तो जब व्यक्ति की क़िस्मत का फ़ैसला स्थान से ही जुड़ा है तो फिर जन्मकुंडली का क्या मतलब है?

इसके जवाब में देवी प्रसाद कहते हैं, "जन्म कुंडली बेमानी नहीं होती है. वो व्यक्ति के भविष्य का पूर्वानुमान होती है लेकिन वो सौ फ़ीसदी सच नहीं होती है."

रात-दिन टीवी पर आने वाले ज्योतिषी, अख़बार में छपने वाले भविष्यफल कितने सटीक हो सकते हैं, ये पूछने पर त्रिपाठी कहते हैं, "इन लोगों ने ज्योतिष शास्त्र का मज़ाक बना दिया है और हर बात को हल्के में पेश कर देते हैं. इस वजह से लोग ज्योतिष को गंभीरता से नहीं लेते हैं."

टीवी पर अक्सर दिखने वाली एस्ट्रोलॉजर दीपिका कहती हैं, "जितने लोग भी उस हादसे में मारे गए उन सबकी किस्मत में उनकी आयु उतनी ही थी. इसे मंडेन एस्ट्रोलॉजी में एक्सप्लेन कर सकते हैं. जितने लोग भी मारे गए उनके जन्म के वक़्त उनके ग्रहों की दशा ऐसी रही होगी कि वो एक साथ मारे गए."

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वहीं जाने-माने लेखक और इतिहास पर शोध करने वाले संजय सोनावणी कहते हैं, "केरल में जो हादसा हुआ वो पूरी तरह से मानवीय भूल थी. लापरवाही थी जिसकी वजह से इतने लोगों की जानें गईं. इसके लिए मंदिर प्रशासन ज़िम्मेदार है. ज्योतिषाचार्य उसे उलजुलूल तरीक़े से समझा रहे हैं. ऐसी ही घटनाएं ज्योतिष की पोल खोलती हैं. सच तो यह है कि ज्योतिष कोई विज्ञान ही नहीं है."

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