स्टार प्लेयर्स के फ़िल्मी स्क्रीनप्ले की 10 बातें

  • 15 अप्रैल 2016
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इस बात में किसी को शक नहीं कि भारत ही नहीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कुछ नाम हमेशा के लिए दर्ज हो चुके हैं.

इनमें सबसे बड़ा नाम है सचिन तेंदुलकर का, जिन्हें दुनिया के अब तक के सबसे महानतम बल्लेबाज़ों में गिना जाता है.

दूसरा नाम है भारत के अब तक के सबसे सफल कहे जाने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का.

तीसरे हैं भारत के पूर्व कप्तान और स्टाइलिश बल्लेबाज़ मोहम्मद अज़हरुद्दीन जिन्होंने 99 टेस्ट मैच खेले.

इसी साल इन तीनों पर फ़िल्में बन रहीं हैं, जिसमें सचिन की बायोपिक में ख़ुद सचिन भी दिखेंगे. अज़हर की भूमिका इमरान हाशमी और धोनी का रोल सुशांत सिंह राजपूत निभाएंगे.

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इंतज़ार फ़िल्मों का है और इसका भी कि क्या इन महान क्रिकटरों के करियर की ये 10 बातें इन फिल्मों में होंगी -

सचिन तेंदुलकर

1. भारतीय टीम के 2008 ऑस्ट्रेलिया दौरे के दूसरे टेस्ट को 'मंकीगेट विवाद' कहते हैं. स्पिनर हरभजन सिंह के ख़िलाफ़ एंड्रयू साइमंड्स पर नस्लभेदी टिपण्णी का आरोप लगा.

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जांच पैनल ने भज्जी को सज़ा के तौर पर तीन मैचों के लिए निलंबित किया. भज्जी ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने दरअसल टिपण्णी नहीं एक भारतीय स्लैंग या गाली जैसे शब्द का प्रयोग किया था.

सचिन के इसी बात का समर्थन करने पर भज्जी को सिर्फ़ जुर्माना देना पड़ा और वे निलंबन से बच गए. एडम गिलक्रिस्ट और रिकी पॉन्टिंग ने बाद में अपनी किताबों में सचिन के इस क़दम की आलोचना भी की.

2. दुनिया की नामचीन कार कंपनी फ़ेरारी ने सचिन को ब्रैडमैन के 29 टेस्ट शतक की बराबरी करने पर स्पोर्ट्स कार गिफ़्ट की. हालांकि सरकार ने उस पर ड्यूटी माफ़ कर दी थी पर कुछ नागरिकों ने इसके ख़िलाफ़ जनहित में दिल्ली हाईकोर्ट में पीआईएल दायर की. किसी फ़ैसले से पहले ही इस कार की ड्यूटी फ़ेरारी कंपनी ने अदा कर दी.

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3. दक्षिण अफ़्रीका के एक दौरे के समय क्रिकेट जगत सकते में आ गया, जब भारतीय टीम के सुपरस्टार सचिन पर अम्पायर माइक डेनेस ने गेंद से छेड़छाड़ का आरोप लगाया और उन्हें एक मैच का बैन थमा दिया.

पोर्ट एलिज़ाबेथ में हुए इस मैच के बाद भारत भर में इसका विरोध हुआ, डेनिस के पुतले जले और भारतीय मीडिया में उन्हें 'रेसिस्ट' बताया. बैन बाद में हट गया पर सचिन ने कई साल बाद इस पर खुलकर अपने ऊपर लगे आरोप को ग़लत बताया.

4. सचिन तेंदुलकर के पास दुनिया के किसी भी बल्लेबाज़ से कहीं ज़्यादा रन हैं लेकिन उनके आलोचक हमेशा यह कहते रहे हैं कि सचिन संपूर्ण मैच विनर नहीं थे. हालांकि ख़ुद सचिन ने अपनी अनगिनत पारियों से इसका जवाब दिया, लेकिन पाकिस्तान के पूर्व गेंदबाज़ शोएब अख़्तर ने अपनी किताब में जब यह बात लिख दी, तो हंगामा मच गया.

सचिन से जब यह पूछा गया, तो उनका जवाब था, "ऐसे बयान पर टिपण्णी करना मेरी गरिमा से नीचे है."

5. सचिन के खेल पर तो कोई शक नहीं लेकिन उनकी कप्तानी में भारतीय टीम कुछ ख़ास नहीं कर सकी. बतौर कप्तान भी उनका रिकॉर्ड सामान्य है.

ख़ुद सचिन ने अपनी ऑटोबायोग्राफ़ी में लिखा है कि वो ऐसा दौर था, जिसके चलते वे खेल को ही छोड़ने का ख्याल कर रहे थे. उन्होंने कहा है, 'बतौर कप्तान मुझे हारना बहुत खल रहा था और अपनी टीम के ख़राब प्रदर्शन के लिए मैं ख़ुद को ज़िम्मेदार ठहरा रहा था."

मोहम्मद अज़हरुद्दीन

1. अज़हरुद्दीन अपने समय के सबसे स्टाइलिश बल्लेबाज़ों में थे और बतौर कप्तान भी उनका रिकॉर्ड बेहतरीन था. मगर दुनिया भर के क्रिकेटप्रेमियों को बड़ा सदमा लगा, जब 1999 के मैच फ़िक्सिंग स्कैंडल में अज़हर का नाम आया.

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान हैंसी क्रोनिए ने जांचकर्ताओं को बताया कि अज़हर ने उन्हें बुकीज़ से मिलवाया था. हालांकि अज़हर ने आरोपों का खंडन किया पर बाद में हुई जांच में वह दोषी पाए गए और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन पर आजीवन बैन लगा दिया गया. आंध्र प्रदेश की एक अदालत ने दशकों बाद 2012 में इस बैन को 'गैरक़ानूनी' बताया.

2. क्रिकेट के मैदान के बाहर अज़हर की निजी ज़िंदगी भी मीडिया की सुर्खियां बटोरती रही. चाहे अपनी पहली पत्नी नौरीन से उनका तलाक़ हो या एक्टर सलमान खान की पूर्व मित्र संगीता बिजलानी से उनकी शादी क्यों न हो.

जब अज़हर राजनीति में आए और मुरादाबाद से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने पहुँचे, तो विपक्षियों ने उनके क्रिकेट करियर पर लगे कथित 'दाग' को भी मुद्दा बनाया. हालांकि अज़हर अपना पहला चुनाव जीत गए.

महेंद्र सिंह धोनी

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1. अब तक के सबसे सफल भारतीय कप्तान धोनी विवाद में तब पड़े जब 2013 में उन पर रिति स्पोर्ट्स कंपनी में शेयर होने का आरोप लगा. ये कंपनी कथित तौर पर धोनी की किसी मित्र की थी और उनके साथ सुरेश रैना, रविंद्र जडेजा और प्रज्ञान ओझा जैसे क्रिकेटरों को भी मैनेज करती थी.

कंपनी ने आरोपों को ख़ारिज कर दिया और कहा कि धोनी की इसमें कोई भागीदारी नहीं. कुछ पूर्व क्रिकेटरों ने इस पर सवाल भी उठाए थे और कहा था कि धोनी इनका नेतृत्व न सिर्फ़ भारतीय टीम में करते हैं बल्कि चेन्नई सुपर किंग्स में भी वे इनके कप्तान हैं.

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2. धोनी और टीम के उनके सीनियरों के बीच रिश्तों पर आज भी कयास लगते हैं. सिलसिला तब शुरू हुआ जब 2007 में उन्हें कप्तान बनाया गया. तुरंत बाद ऑस्ट्रेलिया गई एकदिवसीय टीम में गांगुली और द्रविड़ को जगह नहीं मिली.

कुछ साल बाद ख़बरें आईं कि धोनी और वीरेंदर सहवाग के बीच कड़वाहट आ चुकी है और फिर बाद में ऐसा ही कुछ गौतम गंभीर के साथ भी सुनने को मिला. इस बीच गांगुली और द्रविड़ ने संन्यास ले लिया और वीवीएस लक्ष्मण ने एकाएक हैदराबाद में एक टेस्ट मैच के दो दिन पहले संन्यास की घोषणा कर सबको चौंका दिया.

बाद में उन्होंने कप्तान को अपना फ़ैसला न बता पाने का कारण कम्युनिकेशन गैप बताया था. इसके बाद से वीरेंदर सहवाग अपने ढुलमुल फ़ॉर्म और चयनकर्ताओं की स्कीम से बाहर रहने के कारण टीम से बाहर ही रहे और उन्हें संन्यास लेने के बाद तक शिकायत रही कि उन्हें बोर्ड से फ़ेयरवेल मैच तक खेलने का अवसर नहीं मिला.

कुछ ऐसा ही हुआ जब युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने धोनी पर खिलाडियों के करियर चौपट करने के आरोप लगाए. हालांकि धोनी ने चुप्पी बनाए रखी मगर युवराज सिंह ने धोनी के समर्थन में खुलकर कहा, "धोनी से उनके रिश्ते हमेशा अच्छे रहे हैं.''

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3. धोनी के करियर में अब तक का सबसे बड़ा विवाद 2013 के स्पॉट फ़िक्सिंग स्कैंडल को कहा जा सकता है. बीसीसीआई प्रमुख और चेन्नई सुपरकिंग्स के कर्ता-धर्ता एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मैयप्पन पर बुकीज़ से सांठगांठ के आरोप लगे और पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.

गुरुनाथ वैसे तो चेन्नई सुपरकिंग्स के टीम अधिकारी थे पर इस जांच के दौरान चेन्नई के कप्तान धोनी से भी अदालत में सवाल पूछे गए. हालांकि धोनी का इस मामले में कोई लेना-देना नहीं रहा मगर श्रीनिवासन के साथ उनकी निकटता पर सवाल आज भी उठते हैं.

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