जिनका काम ही है इंटरनेट पर ज़हर उगलना

  • 17 अप्रैल 2016
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हाल ही में एक पत्रकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छेड़छाड़ की गई एक तस्वीर ट्वीट की. इसमें नरेंद्र मोदी सऊदी राजा के पांव छूते नज़र आ रहे थे.

थोड़ा सा ध्यान देने से साफ़ हो जाता है कि फ़ोटो नकली और फ़ोटोशॉप्ड है.

इस तस्वीर पर ट्विटर पर भाजपा नेता महेश गिरी ने कड़ी आपत्ति उठाते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली, सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन राठौर को टैग किया.

राठौर ने महेश गिरी को जवाब दिया कि उन्होंने मंत्रालय को ‘उल्लंघन’ की समीक्षा करने को कहा है और वह संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद की भी मदद लेंगे.

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बाद में उस पत्रकार और जिस चैनल में वह काम करते थे, दोनों ने माफ़ी मांगी.

जब ये सबकुछ हो रहा था तब एक और ख़बर अख़बारों के कोने में दबी-दबी सी थी लेकिन सोशल मीडिया में इसकी काफ़ी चर्चा थी.

और ख़बर यह कि उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना नाम के संगठन का संस्थापक बनाने वाले अमित जानी ने जेएनयू छात्र कन्हैया कुमार और उमर ख़ालिद को मीडिया साक्षात्कारों में मारने की खुलेआम धमकी दी.

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आलोचकों ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए कि सरकार ख़ामोश क्यों है और तुरंत अमित जानी के खिलाफ़ कार्रवाई क्यों नहीं हुई.

बीबीसी से बातचीत में भी अमित जानी ने दावा किया कि उनकी संस्था से जुड़े लोग विश्वविद्यालय में छात्र हैं और वो कन्हैया और उमर ख़ालिद को जान से मारने को तैयार हैं.

मेरठ के रहने वाले अमित जानी खुद को उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का मित्र बताते हैं और कई भाजपा नेताओं के साथ उन्होंने तस्वीरें खिंचवा रखी हैं.

अमित जानी भारतीय सेना के बारे में कन्हैया कुमार और उमर ख़ालिद के कथित वक्तव्यों से नाराज़ थे. दिल्ली पुलिस ने इस बारे में कोई प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया.

इन धमकियों पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संगठन ने वाइस चांसलर को पत्र लिखा लेकिन कन्हैया की एक सहयोगी के मुताबिक़ पुलिस की ओर से कन्हैया और उमर को सुरक्षा मुहैया करने के लिए उस दौरान कोई कार्रवाई नहीं हुई.

हालांकि शुक्रवार को ख़बरें आईं कि पुलिस कन्हैया औऱ उमर की सुरक्षा की दोबारा समीक्षा कर रही है.

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यह ख़बर उन रिपोर्टों के बाद आई जिनमें कहा गया कि दिल्ली की एक बस में रिवॉल्वर के साथ एक चिट्ठी मिली, जिसमें कन्हैया और उमर को जान से मारने की धमकी दी गई थी.

बीबीसी से बातचीत में भाजपा सांसद महेश गिरी ने तर्क दिया कि जेएनयू मामले में तय हुआ था कि पुलिस सीधे तौर पर कार्रवाई नहीं करेगी और ''अगर ऐसा हो तो मैं स्मृति जी (ईरानी) से बात करूंगा.''

उनके अनुसार ''देश के सर्वोच्च पद पर बैठने वाले प्रधानमंत्री को जिस तरह उस तस्वीर में पेश किया, उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए.''

महेश गिरी को ऐसी तस्वीरों में कोई राजनीतिक हास्य नहीं दिखता.

सोशल मीडिया पर उन तस्वीरों की भरमार है जिनके साथ छेड़छाड़ की गई हो. लोग द्वेष, ग़ुस्से, मज़ाक और दूसरे कई कारणों से इन तस्वीरों का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर करते हैं और ज़हर उगलते हैं.

वेबसाइट कोरा पर किसी ने एक सवाल उठाया कि इंटरनेट पर इतने सारे भारतीय आख़िरकार इतना ज़हर क्यों उगलते हैं, क्यों वो अभद्र भाषा इस्तेमाल करते हैं.

चिराग जैन के अनुसार सोशल साइट्स पर द्वेष का कारण ‘राजनीतिक घृणा’ है.

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वे कहते हैं, ''ये वो लोग हैं जो राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के बहकावे में आकर ज़हर उगलते हैं. वो इसका ख़्याल नहीं रखते कि उनके शब्दों से भारत की छवि ख़राब होती है. और इसके लिए सरकार भी ज़िम्मेदार है, जो सांप्रदायिक सद्भाव लाने का वायदा तो करती है पर उसके अनुयायी ज़हर फ़ैलाते हैं.''

एडी यादव कोरा पर लिखते हैं कि ज़हर उगलने वाले बहुत से लोग पेड सोशल मीडिया टीमों से संबद्ध हैं और वो अपना काम कर रहे हैं. यादव सोशल मीडिया पर डराने धमकाने को एक समस्या बताते हैं.

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उनका कहना है, ''दूसरा वर्ग उन चिरकालिक अतिवादियों का है, जो निजी कारणों और पेशेवर कारणों से अंधे हो जाते हैं. उन्हें पैसे नहीं दिए जाते पर वो अपनी सोच का बचाव करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं.''

दलित लेखक कंवल भारती ने दुर्गा नागपाल मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की थी तो उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था. वह फ़ोटोशॉप्ड तस्वीरों के विरोधी हैं, लेकिन पुलिस कार्रवाइयों को वो अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला मानते हैं जहां ''विरोधियों से ज़्यादा निपटा जा रहा है और समर्थकों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है.''

भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 35 करोड़ के नज़दीक है. ये संख्या 2017 में 50 करोड़ के पार चली जाएगी.

क़ानूनन किसी को जान से मारने की धमकी देना अपराध है.

वकील प्रशांत मनचंदा के अनुसार अमित जानी मामले में पुलिस की ज़िम्मेदारी है कि वह जांच करे, कार्रवाई करे और अपराध होने से रोके.

प्रशांत कहते हैं कि अगर किसी को इंटरनेट पर कोई धमकी देता है तो उस व्यक्ति को तुरंत पुलिस के पास जाकर शिकायत दर्ज करनी चाहिए.

उनके मुताबिक़ अगर कोई महिला पुलिस के पास इंटरनेट पर बलात्कार की धमकी जैसे मामले में शिकायत लेकर जाती है तो पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ेगी और पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो पुलिसकर्मी के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई हो सकती है.

याद रहे कई महिला पत्रकारों को ट्विटर पर उनके विचारों को लेकर धमकियां मिल चुकी हैं.

उधर, सरकार के आलोचक ये कह रहे हैं कि छेड़छाड़ किए गए वीडियो, तस्वीरें तो सोशल मीडिया पर आम हैं तो सरकार कितने लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर सकती है.

याद रहे, एक नकली ट्विटर अकाउंट के आधार पर दिल्ली पुलिस और राजनाथ सिंह के बयान आए थे. पीआईबी ने प्रधानमंत्री मोदी की फ़ोटोशॉप्ड तस्वीर जारी की थी, पर वह मामला आगे नहीं बढ़ा.

2014 के लोकसभा चुनाव अभियान को याद करें तो गुजरात के विकास और नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को दर्शाती कई फ़ोटोशॉप्ड तस्वीरें ज़हन में आती हैं.

उधर, कंवल भारती के अनुसार फ़ोटोशॉप्ड तस्वीरों के मामले में कोई भी पार्टी दाग़ से परे नहीं और कई बार कार्रवाई इस पर निर्भर होती है कि सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठा है.

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