'लड़की को आज़ादी से घूमने नहीं दे रही है पुलिस'

  • 19 अप्रैल 2016
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भारत प्रशासित कश्मीर के हंदवाड़ा में कथित तौर पर छेड़छाड़ का शिकार हुई लड़की की पुलिस हिरासत से रिहाई विवादों में है.

पुलिस का कहना है कि लड़की को छोड़ दिया गया है लेकिन आरोप है कि रिहाई के बाद भी पुलिस लड़की को पूरी आज़ादी के साथ घूमने फिरने नहीं दे रही है और उस पर नज़र रख रही है.

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स्थानीय लोगों और इस लड़की की मां के मुताबिक़ सेना के एक जवान ने उसके साथ छेड़छाड़ की थी लेकिन एक वीडियो में लड़की बयान देते नज़र आ रही है कि सेना के किसी जवान ने उनसे छेड़छाड़ नहीं की थी, बल्कि कुछ स्थानीय लोगों ने उसके साथ छेड़छाड़ की थी.

उसके बाद पुलिस ने ये कहते हुए लड़की को हिरासत में ले लिया था कि उसकी सुरक्षा को ख़तरा है.

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अब जम्मू-कश्मीर कोएलिशन ऑफ़ सिविल सोसाइटी नाम की एक संस्था ने पुलिस के इस दावे पर सवाल खड़े किए हैं कि लड़की को पुलिस के पहरों से आज़ाद किया गया है.

वकील और जम्मू-कश्मीर कोएलिशन ऑफ़ सिविल सोसाइटी के मुखिया परवेज़ इमरोज़ ने दावा किया कि लड़की अभी तक पुलिस की निगरानी में है.

वो कहते हैं, "लड़की तो अभी तक पुलिस निगरानी में है. लड़की की सुरक्षा के नाम पर पुलिस उस मासूम बच्ची के साथ-साथ घूम रही है. हमारी लीगल टीम दो दिन पहले लड़की से मिलने गई थी तो वहां उसके साथ कमरे में चार पुलिस वाले बैठे थे. जहां वह अभी रह रही है वहां पुलिस का कड़ा पहरा है. तो ये कैसी रिहाई है? ये तो गैर क़ानूनी है."

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इमरोज़ कहते हैं कि लड़की का बयान पुलिस के दबाव में दिलवाया गया है. लड़की की मां ने भी पुलिस पर यही आरोप लगाए हैं.

इमरोज़ के मुताबिक़, "जज और पुलिस के सामने लड़की ने जो बयान दिया है वह ग़लत है. दोनों ही बयान दबाव में आकर दिए गए हैं. हम चाहते हैं कि लड़की वहां से निकल कर यहाँ दबाव के बग़ैर अपना बयान दे. लड़की ने ख़ुद हमारी टीम को कहा है कि पुलिस ने उस पर दबाव डाला."

लेकिन पुलिस इन सभी आरोपों से इनकार कर रही है.

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उत्तरी कश्मीर के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस उत्तम चंद ने बताया, "हमने तो लड़की को छोड़ दिया है. वह कभी अपने मामा के घर रह रही है तो कभी चाचा के घर में. हमने सिर्फ़ उसको प्रोटेक्शन दिया है. रही दबाव की बात तो लड़की ने जज के सामने बयान दिया है."

स्थानीय विधायक सज्जाद लोन इस बारे में कहते हैं, "ये मामला अभी विवादित है. अगर पुलिस कहती है कि लड़की उनके पास नहीं है तो फिर नहीं होगी. लड़की के भी अपने अधिकार हैं."

वहीं जम्मू-कश्मीर महिला आयोग की चेयरपर्सन नईमा महजूर कहती हैं कि वह लड़की को हर हाल में आश्रय देने की कोशिश कर रही हैं.

ये पूरी घटना 12 अप्रैल की है जब श्रीनगर से 74 किलोमीटर दूर हंदवाड़ा क़स्बे में तनाव बढ़ा जब कुछ स्थानीय लोगों ने सेना के एक जवान पर लड़की से छेड़छाड़ का इल्ज़ाम लगाया था.

इसके बाद हिंसक प्रदर्शन हुए और सेना की फ़ायरिंग में तीन नौजवान मारे गए थे. एक महिला भी घायल हुई थी जिसकी दूसरे दिन मौत हो गई थी.

एक अन्य नौजवान की मौत आंसूगैस का शेल लगने से हुई थी. सेना की फ़ायरिंग के ख़िलाफ़ घाटी में चार दिन बंद रहा था.

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